हे माँ नर्मदा......? 

अनूपपुर - माँ नर्मदा अनूपपुर की नही अपितु देश की माँ है,और मध्यप्रदेश की तो जीवनदायनी कहलाने वाली माँ है,पर धन्य है इस माँ के वो लाल जो विकास की बयार में माँ को मानो वृद्धा आश्रम तक पहुंचा दिया,धन्य है वो मठाधीस जो माँ नर्मदा की गोद मे रहते है और माँ नर्मदा के नाम पर खरबों की संपत्ति बनाये बैठे है,और आज माँ नर्मदा की हालत देख कर शर्म को भी शर्म आ जाये पर माँ नर्मदा के संरक्षण के नाम पर जो विनास किया जा रहा है वो दुःखद ही नही दुर्भाग्यपूर्ण है और इन विनास लीला करने वालों को चुल्लू भर की शर्म नही है माना कि यहां के राजनेताओं के आंखों का पानी मर गया नही दिखता इन्हें विकास और विनास में फर्क इन्हें दिखता है अपना विकास पर सायद ये भूल जाते है इसी गोद मे सब मिला है और इसी गोद मे एक दिन सिमट जाना है पर माँ की ऎसी हालत में आप को सायद वो भी नसीब नही होगा

आज से चंद वर्षों पहले माँ नर्मदा की धार कभी न रुकी न थमी अविरल माँ अपने वेग से चलती रही पर इन संरक्षण रूपी राक्षसों ने माँ नर्मदा को आज उद्गम स्थलीय में ही विराम लगा दिया और धन्य है वो राजनेता जो अपने विकास के लिए माँ के चरणों मे जाते है और अपनी मुरादें तो पूरी कर लेते है पर माँ नर्मदा की विलुप्त हो रही धारा की तरफ किसी का मन नही डोलता

सुने विकास रूपी जिला प्रशासन विनास कर रहे हो

संभाग के संभागायुक्त से लेकर जिला कलेक्टर सहित आला अधिकारी आज सुने अगर आप ने अमरकंटक के आस पास के 20 किलोमीटर में ये विकासः रूपी कंक्रीट की विनास लीला नही बंद की तो वो दिन दूर नही जिस दिन माँ नर्मदा अपने घर मे ही अपनो से रुठ कर अपनी अविरल धारा को समेट कर शांत हो जाएं और उसका खामियाजा आप नही भुगतेंगे उसका खामियाजा माँ की गोद मे पलने वाले यहाँ के रहवासी भुगतेंगे अभी भी समय रहते चेत जाइये और माँ नर्मदा की गोद मे कंक्रीट का विनास रूपी खेल बंद कीजिए,वार्ना आप भी माँ के प्रकोप के भागी रहेंगे और फिर सिर्फ पश्चाताप ही रह जाएगा

बाबाओं के आगे माथा टेकने से नही बचेगी माँ

जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की चली आ रही घोर लापरवाही या सुस्त रवैया के कारण यहां रह रहे बड़े बड़े बाबाओं ने अपने आप को मठाधीस सबित करने के लिए एक से बड़े एक आश्रम तो बनाते चले गए और इन आश्रमो के बनने में वृक्षों की अंधाधुंध कटाई तो हुई ही ऊपर से सीमेंट और कंक्रीट की विनास लीला की ऐसी विसात बिछाई की आज माँ अपने ही घर मे अविरल न रह सकी जिले के कलेक्टर चन्द्रमोहन ठाकुर जी कम से कम माँ नर्मदा की गोद मे तो आप भी है माना कि कई लोग आप जैसे कलेक्टर की कुर्सी पर विराजमान होने आये और अमरकंटक विकास के नाम पर विनास लीला कर के चले गये पर अब वक्त आ गया है अभी नही तो कभी नही इसलिए आप हमारी माँ नर्मदा की गोद मे आये है और माँ नर्मदा कभी किसी से भेदभाव नही करती जो आया उसे अपना लिया फिर आप का भी तो फर्ज बनता है, माना कि आप प्रशासन के नियम कायदों में बधें पड़े है और हमे ये भी पता है जिस दिन आप अमरकंटक के विनास लीला को रोकने आंगे बढ़ेंगे आप का ट्रांसफर कराने कई मठाधीस तैयार खड़े मिलेंगे पर माँ की गोद मे मठाधिसों से क्या भय क्या लेकर आये है क्या लेकर जाएंगे आज यहां है कल कही और चले जायेंगे पर हम माँ की गोद मे आये है और माँ की गोद मे ही जायेंगे और हम सब की उम्मीद बस इतनी है जिस कल कल करती माँ की अविरल गोद मे हम आये है माँ की अविरल धारा में समा जायें

विनास लीला ने बदल दी तस्वीर
अमरकंटक माँ नर्मदा की पावन धरा को देश की राजनीति पवित्र नगरी का दर्जा देती है धिक्कार है आप की इस सोच का हमे तो अमरकंटक की वो धरा चाहिए जो गर्मी में भी अपने श्रद्धालुओं को भिगो दें कड़ाके की गर्मी में ठंडक का अहसाह करा दे पेढों की जड़ों से बूंद बूंद टपकता पानी माँ नर्मदा की गोद मे समाहित हो अपने आप को धन्य समझने वाला अमरकंटक चाहिए, दूध से बहने वाली दूध धारा की अविरलता चाहिए नही चाहिए आप की ऊंची ऊंची मंजिले नही चाहिए बड़े बड़े बाबाओं के मठाधीस मठ, हमे तो चाहिए अविरल माँ नर्मदा की अनवरत धारा और जिला प्रशासन अगर समय रहते नही चेता तो माँ नर्मदा की अविरलता को लोग तरस जाएंगे जिला प्रशासन से उम्मीद है कि समय न गंवाते हुए अमरकंटक को उसके अपने प्राकृतिक तौर पर रहने दें उससे छेड़ छाड़ बंद हो अमरकंटक के 20 किलोमीटर किसी भी तरफ अब कोई निर्माण कार्य पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किये जायें