आदिवासी सहायक आयुक्त के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का उठा मुद्दा
जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका हुई दायर
अनूपपुर। जिले के आदिवासी सहायक आयुक्त के खिलाफ लगातार षिकायते होने के बाद जाति प्रमाण-पत्र के मामले को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई; जनहित याचिका दायर करने वाले जिले के निवासी मुरलीधर मिश्रा ने सहायक आयुक्त के भर्ती से लेकर पदोन्नति में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र का मुद्दा उठाया है। उन्होने प्रमुख सचिव से लेकर जिले के कलेक्टर को पत्र लिखते हुए जांच की मांग की है। उन्होने बताया कि दया शंकर राव, मूल पद प्राचार्य, कशिप, जैतहरी, जिला अनूपपुर (म.प्र.)य मूलतः उत्तर प्रदेश के जिला जौनपुर के एससी वर्ग के निवासी हैं, परन्तु उनके द्वारा कूटरचित तरीके से मप्र के एससी वर्ग का जाति प्रमाण बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया है तथा तीन-तीन पदोन्नति प्राप्त की गई है। 
डी.एस. राव के द्वारा आरक्षण का लाभ लेकर म.प्र. में पदोन्नतियाँ प्राप्त की गई हैं तो यह आवश्यक है कि राव के पास म.प्र. के एससी वर्ग का जाति प्रमाण-पत्र हो. और ऐसा है तो इससे स्पष्ट है कि राव ने कूटरचित तरीकेे से अपना जाति प्रमाण-पत्र म.प्र. के एससी वर्ग का बनवा लिया है। यह एक गंभीर अपराध है तथा ऐसे आपराधिक कृत्य के लिये राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर इनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाना चाहिय। अन्य माध्यमों से डी.एस.राव के संबंध में जो जानकारियाँ माँगी जा रही हैं उन्हें आजाक विभाग द्वारा प्रदान नहीं किया जा रहा है. क्योंकि भोपाल स्तर पर शासन में बैठे, इसी प्रवर्ग के , कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा डी.एस. राव का पुरजोर समर्थन किया जा रहा है तथा अनुचित संरक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।
सभी नियमों व मान. उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशों को ताक पर रखते हुये, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, अनूपपुर, का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया है. इस तरह ऐसे प्राचार्य को सहायक आयुक्त बना दिये जाने की भी पृथक से जाँच होनी चाहिये तथा दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिये भले ही वे किसी उच्चस्तर पर क्यों न बैठे हों मुरलीधर मिश्रा ने मान. उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की है तथा मांग किया है कि अंतिम निर्णय आने तक, राव को अनूपपुर जिले से बाहर अन्यत्र पदस्थ किया जावे. और अनूपपुर जिले में कदापि पदस्थ न किया जाये, क्योंकि अनूपपुर जिले में पदस्थ रहते हुए राव जाँच को प्रभावित करेंगे तथा निष्पक्ष जाँच हो ही नहीं पायेगी।
          इनका कहना है
हमारे उपर जो आरोप लगाये जा रहे है वह पूरी तरह से निराधार है पूर्व के कुछ अधिकारियों के ईषारे पर इस तरह का आरोप लगाकर ब्लेकमेल करने का प्रयास किया जा रहा है हमारी नियुक्ति और पदोन्नत सारे मापदण्डो को देखने के उपरांत ही शासन ने किया है। जांच होने के बाद सच्चाई सामने आ जायेगी।
डी.एस.राव
सहायक आयुक्त, आदिवासी विभाग अनूपपुर