विकास के नाम पर प्रकृति से खिलवाड, कांक्रिट के चंगुल मे अमरकंटक

अनूपपुर- प्रकृति की गोद मे बसा अमरकंटक मनोरम दृष्य के लिये जाना जाता है।

धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन मे अलग पहचान लिये मैकांचल की पहाड़ी मे बसी पवित्र नगरी अब सीमेंट, कांक्रिट के जाल से पटती जा रही है। आदूरदर्षिता वाली इस विकास से जहां प्राकृतिक वनस्पति, भौगोलिक संरचना पर विपरीत असर पड़ रहा है तो वहीं बिछाई जा रही कांक्रिट मे भी भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। 
अनूपपुर। अमरकंटक म.प्र. व छ.ग. राज्य की सीमा मे बसा छोटा सा कसबानुमा स्थान है। सतपुड़ा, विंध्य, मैकल जैसे तीन बड़े पर्वत श्रंखला का मिलाप इसी स्थान मे होना बताया जाता है। दो दषक पूर्व यहां प्रकृति के मनोरम दृष्य अपनी छटा बिखरते साफ दिखाई देते रहे। तब यहां सैलानियो का आना जाना बना रहता था जैसे जैसे विकास के नाम पर गुणवत्ताहीन कांक्रिट के जाल से अमरकंटक को पाटा जाने लगा सैलानियों के आने जाने पर भी इसका असर पड़ने लगा। सोन, जोहिला, नर्मदा समेत 3 बड़ी व 15 छोटी पहाड़ी नदियों की उदगम स्थली गर्मियों के मौसम मे पानी की बूंदो के लिये तरसती दिखाई पड़ती है। यहां कई छोटी बड़ी झीलें अब अपना अस्तित्व खो चुकी है। प्राकृतिक रुप से बेहतर पानी की उपलब्धता अब समाप्ति की तरफ बढ़ रही है। जल्द ही अमरकंटक के विकास को उसकी वास्तविक व भौगोलिक संरचना के अनुसार नही ढाला गया तब इस पवित्र नगरी के अस्तित्व मे ही संकट आ जायेगा।  

इतिहास के पन्नों से अमरकंटक 
नर्मदा उदगम स्थल सनातन धर्मावलंबियों के लिये हमेषा से पवित्र स्थान के रुप मे पूजा जाता रहा, पौराणिक धार्मिक ग्रंथों की कथाओं मे अमरकंटक का उल्लेख आता है। सघन वन क्षेत्र के बीच नर्मदा नदी की उद्गम स्थली दलदली क्षेत्र से ढकी रही। 7 प्रमुख जल स्रोतों से रिसकर आने वाला पानी नर्मदा कुंड मे इकत्रित होता रहा। सघन वन क्षत्र मे लगे साल के वृक्ष यहां के जल स्रोतों के लिये वरदान बने रहे। ऐसी सभी कुदरती व्यवस्था से नर्मदा नदी अपने उदगम से बारहो माह निर्मल जल धारा लिये बहती आ रही है। अमरकंटक तक पहंुचने का रास्ता दुर्गम पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरता था। तब यहां की आबादी नागण्य रही बाद मे रीवा रियासत के राजा गुलाब सिंह द्वारा उदगम क्षेत्र के चारो तरफ दीवार बनाकर इसे सुरक्षित किया गया। बीते दषकों मे साडा का गठन किया गया तब से यदाकदा विकास के नाम पर बसाहट पर जोर दिया गया षायद तब की यह जरुरत रही हो वर्ष 2003 मे तात्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती ने इसे पवित्र नगरी का दर्जा दिया तब से बिना दूरगामी परिणामों की चिंता किये बेहिसाब कांक्रिट के जाल आज तक बिछाये जा रहे है जिससे यहां की वास्तविक भौगोलिक स्थिति के उपर लगातार विपरीत प्रभाव पड़ता जा रहा है। 

पुजारी से नगर परिषर का सफर
अमरकंटक के विषय मे जानकारी रखने वालों से मिली जानकारी अनुसार यहां का रखरखाव के लिये रीवा रियासत ने पुजारी की व्यवस्था की थी तब से पुजारियोें का परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी नर्मदा उदगम स्थल का रखरखाव पूजा अर्चना के साथ करता आ रहा है। आजादी के बाद नगर विकास बोर्ड  के रुप मे अमरकंटक के विकास की रुपरेखा बनाई गई तब इस बोर्ड के अध्यक्ष राज्यपाल हुआ करते रहे फिर 70-80 के दषक मे साडा नांमक संस्था का गठन किया गया जिसमे रिटायर आईएएस अधिकारी एम. के. खरे को पहला चेयरमेन बनाया गया। षहडोल संसदीय क्षेत्र से सांसद रहे स्व. दलबीर सिंह दूसरे चेयरमेन के रुप मे कार्य संभाले तब तात्कालीन सांसद दलबीर सिंह को प्रधानमंत्री राजीव गांधी मंत्री मंडल मे षहरी विकास राज्य मंत्री बनाया गया। तब उनके साडा चेयरमेन से त्यागपत्र देने के बाद भोलानाथ राव इस पद पर विराजित हुये। लल्लू गुप्ता, अमर सिंह मामू भी क्रमषः अध्यक्ष पद पर विराजित होते रहे। अमर सिंह मामू के बाद भारी विरोध के बाद भी साडा को भंग कर नगर पंचायत का गठन किया गया तब बलीराम के रुप मे पहला अध्यक्ष चुना गया। वर्ष 2003 मे जब पवित्र नगरी का दर्जा अमरकंटक को मिला तब यहां नर्मदा सिंह अध्यक्ष पद के दायित्व का निर्वहन कर रहे थे। यह वह समय है जब बेतहासा निर्माण कार्य करा राज्य सरकार विकास के दावे कर रही थी। तब से लेकर आज तक बेतरतीब निर्माण कार्य अब भी जारी है। 

स्मार्ट सिटी य वास्तविकता से खिलवाड़
पवित्र नगरी अमरकंटक को स्मार्ट सिटी के रुप मे विकसित करने का प्रस्ताव पारित कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जानकारो की माने तो अमरकंटक पहले से ही कांक्रिट की जाल मे फंसकर अपनी भौगोलिक स्थिति खोता जा रहा है। जिससे यहां से निकलने वाली अधिकांस नदियां झीलें अब इतिहास बनकर रह गई है। प्रमुख्य तीन नदियों पर भी ग्रीष्म काल मे पानी का आभाव बीते वर्षो मे देखा गया है। एनजीटी के प्रावधानों अनुसार नर्मदा नदी के 100 मीटर दायरे मे कोई भी निर्माण कार्य नही किया जा सकता जिसका उलंघन होते हुये अमरकंटक मे दिखाई देता है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जो निर्माण कार्य किये व कराये जा रहे है वह भी भ्रष्टाचार से भरे हुये है। सीवर लाईन के नाम पर बनी नर्मदा उदगम पहुंच मार्ग मे नाली रुपी गड्ढे खोदकर मरम्मत कार्य नही कराया गया जिससे श्रद्धालू व सैलानियों को परेषानी का समना आये दिन करना पड़ता है। यहां के प्रायः सभी दार्षनिक व श्रद्धा केेन्द्र अब प्राकृतिक न रहकर कांक्रिट की मकड़जाल से ढक गये है। कांक्रिट से जहां वर्षा का पानी जमीन मे अवषोषित नही हो पाता तो वहीं जंगली पेड़ पौधे नही उग पाते। जिससे यहां का तापमान मे लगातार बढ़ोत्तरी देखी गई है जा रही है। 

इनका कहना है
नगर विकास परिषद की बैठक कलेक्टर की उपस्थिति मे होती है तब इस बात का प्रस्ताव ला चर्चा की जायेगी। अमरकंटक के विकास मे हर पहलुओं को परख कार्य किया जायेगा। 
पवन साहू
सीएमओ नगर परिषद अमरकंटक

कांक्रिट से निर्माण करना ही विकास नही होता भौगोलिक स्थिति को समझ संरचना को सहेजना ही वास्तविक विकास है। षहर, कस्बा, गांव, पहाड़, नदी सभी के विकास एक सा नही हो सकता। 
वन्दे महाराज
पुजारी नर्मदा मंदिर अमरकंटक