कोतवाली थाना क्षेत्र में 5 नवम्बर को नाबालिग के अपहरण एवं फिरौती की मांग पर की गई कार्यवाही पर एक नया मोड़ आया, जहां पुलिस पर आरोप है की 5 नवम्बर की रात लगभग 8:30 बजे पुलिस ने न्यायालय स्थित घर से तीन लोगो को कार सहित उठाकर थाने लाई थी, इस दौरान कार में कोई नाबालिग नही था, जिसे आसपास के सभी लोगो ने देखा था, इतना ही नही आरोप यह भी है कि थाने में आरोपी और उनकी कार लाने के बाद पुलिस स्वयं कार को लेकर नाबालिग के घर पहुंचती है और वहां से नाबालिग और उसकी मॉ को घर बैठाकर थाने लाकर आरोपियों पर फिरौती और अपहरण का मामला पंजीबद्ध कर रात 1:30 बजे पूरी घटनाक्रम की कहानी बनाकर फंसाई है। जिसको लेकर न्यायालय के आसपास के निवासियों ने न्यायालय से लेकर कोतवाली तक की सीसी टीवी फुटेज की जांच एवं एक बार थाने लाने के बाद दोबारा नाबालिग को लाने गई सीसी टीवी की जांच कर निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की है।

एैसा खुला कोतवाली पुलिस का राज

अपहरण एवं फिरौती के मामले में गीता राठौर पति रामजी राठौर निवासी वार्ड क्रमांक 9 के साथ लगभग दो दर्जन से अधिक आसपास के लोगो ने 8 नवम्बर को कोतवाली थाना पहुंचकर लिखित शिकायत कर बताया की 5 नवम्बर की रात लगभग 8:30 बजे अचानक कोतवाली पुलिस हमारे घर पहुंची और तीन लोगो को पकड़ते हुए कार को अपने साथ ले गई, उस समय कार में कोई नाबालिग नही था, जिसे वार्ड क्रमांक 9 में लगभग आधा सैकड़ा लोगो ने देखा गया, फिर एैसा क्या हुआ की थाने पहुंचते-पहुंचते पुलिस ने नाबालिग को कार के अंदर से दिखाकर मेरे पति पर पुलिस ने झूठा अपहरण और फिरौती का झूठा मुकदमा दर्ज की है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की गई।

पूरी कहानी आई सामने, पुलिस बनी रही अंजान

पूरे मामले में जो कहानी निकल कर सामने आई वह भी चौंकाने वाली है। जानकारी के अनुसार पुलिस द्वारा बनाए गए आरोपी रामजी राठौर के घर नाबालिग का आना जाना पहले से था। जहां 20 से 25 दिन पूर्व नाबालिग ने रामजी राठौर के घर में घुस कर 50 हजार रूपए की चोर की थी जिसकी बात रामजी राठौर का पता चलने के बाद उसने अपने पडोस में रहने वाले ओम प्रकाश प्रजापति, आशीष पटेल, मुकेश पयासी एवं रामजी के घर में रहने वाले किराए दार ने मिलकर उसकी खोजबीन की तथा पूरे मोहल्ले के सामने नाबालिग की मां को बुलाया गया। नाबालिग के मिलने पर उसने 46 हजार रूपए वापस और 4 हजार रूपए खर्चा किया जाना बताया। जहां पर नाबालिग की रिपोर्ट किए जाने पर मोहल्ले के लोगो ने उसकी ना समझी की बात कह रिपोर्ट करने से मना किए जाने एवं बाकी के 4 हजार रूपए उसकी मॉ ने वापस किए जाने का मोहल्ले वालो के सामने कही थी।

पुलिस के सहयोग से नाबालिग की मॉ ने झूठा फंसाया

इस पूरे मामले में 5 नवम्बर को जब रामजी ने अपने 4 हजार रूपए की मांग नाबालिग की मॉ से की गई, जिस पर उसने रूपए देने से मना कर दिया, इस बीच रास्ते में रामजी अपने दो दोस्तो के साथ घुम रहा था, जहां नाबालिग मिल गया, जिस पर रामजी ने गुस्सा में आकर नाबालिग को मारने लगा और वहां से चला गया। इस बीच नाबालिग की मॉ ने 100 डॉयल एवं पुलिस को सूचना देते हुए रामजी के खिलाफ अपहरण एवं फिरौती की झूठी शिकायत की, जहां पुलिस ने तीन लोगो को उनके घर से 8:30 बजे पकडकर उनकी कार थाने लाई और उसके बाद उन्ही की कार से स्वयं पुलिस नाबालिग के घर जाकर उसकी मॉ और नाबालिग को उसकी कार में बैठाकर लाते हुए झूठा अपहरण एवं फिरौती का मामला पंजीबद्ध कर दिया। जिसके बाद से आम जनमानस पर पुलिस की इस कार्य प्रणाली पर रोष व्याप्त है।

आम जनमानस की सुरक्षा पर उठे सवाल

जहां नाबालिग के अपहरण और फिरौती की मांग को लेकर पुलिस ने बनाई कहानी के बाद स्थानीय लोगो में भी रोष व्याप्त है। जहां रात लगभग 8:30 बजे पुलिस ने पकड़े तीन आरोपियों को आधा दर्जन से अधिक लोगो के देखने के बाद हर व्यक्ति को कोतवाली पुलिस द्वारा दी जा रही सुरक्षा पर सवाल खड़े हुए है। लोगो का कहना है कि कोतवाली पुलिस किसी को भी पकड़कर झूठे मामले में फंसाने का डर सताने लगा है। जब पुलिस जिला मुख्यालय से ही सैकडो लोगो के सामने किसी को पकड़कर थाने लाकर उस पर इस तरह का झूठा मुकदमा कर सकती है वे अपनी सुरक्षा की मांग किससे कर सकते है।