झाबुआ । सांप्रदायिक सौहार्द और सामंजस्य के मामले में झाबुआ का हमेशा से उजला इतिहास रहा है। इसी परंपरा को अब भी यहां निभाया जा रहा है। अपने मुस्लिम भाइयों से भाईचारा निभाते हुए 80 वर्ष से अधिक समय से गणपति स्थापना करते आ रहे सार्वजनिक गणेश मंडल ने आगामी 21 सितंबर को यौमे आशुरा के मातमी माहौल व ताजिया विसर्जन को देखते हुए कोई भी आयोजन न करने का फैसला किया है। मंडल ने अपने निमंत्रण पत्र में दर्शाए आयोजनों में 21 तारीख को बाकायदा मोहर्रम दर्शन लिखवाया है।
शहर के राजवाड़ा चौक पर स्टेट काल से सार्वजनिक गणेश मंडल गणपति स्थापना करता आया है। 10 दिनों तक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। इस बार भी यह सब हो रहा है, लेकिन 21 सितंबर को राजवाड़ा चौक पर ताजियों का स्थान भी रहेगा। ऐसे में मंडल ने इस दिन के आयोजनों के रूप में मोहर्रम दर्शन को शामिल किया।
राजवाड़ा चौक को पुराने लोग गोपाल चौक के नाम से जानते हैं। यहां राजा गोपालसिंह की प्रतिमा होने से इसका यह नाम पड़ा।

बताया जाता है कि पूर्व राजा उदयसिंह के समय सार्वजनिक गणेश मंडल की स्थापना हुई थी। तब से लगातार सहयोग और सामंजस्य से यह पर्व मनाया जाता रहा है। आयोजन में पहले भी मुस्लिम समाज के लोग शामिल होते थे। इस बार 13 से 23 सितंबर तक हो रहे आयोजनों के निमंत्रण पत्र में लिखा गया कि सार्वजनिक गणेश मंडल में सभी नागरिक सहयोग और सहभागिता द्वारा एकता को प्रदर्शित करते हैं। इसी वाक्य का अनुसरण करते हुए मोहर्रम के ताजिया विसर्जन के दिन कोई आयोजन नहीं रखा गया। समिति के इस निर्णय से जिला प्रशासन और पुलिस ने भी राहत ली है।
कुछ वर्ष पहले मोहर्रम और नवरात्र पर्व साथ आने के समय पुलिस व प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पसीना आ गया था। तब भी शहर में दोनों समाजों के वरिष्ठों ने सक्रिय भूमिका निभाई थी। नवरात्र का आयोजन देर से शुरू किया गया। इसके पहले मोहर्रम का जुलूस राजवाड़ा चौक से होकर गुजर गया था।

समरसता शहर की पहचान
सार्वजनिक गणेश मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरजसिंह राठौर ने बताया कि समरसता झाबुआ शहर की पहचान है। इसे सार्वजनिक गणेश मंडल ने कायम रखा है। हर साल मोहर्रम पर ताजियों का जुलूस राजवाड़ा चौक आता है। 21 सितंबर को भी आएगा, इसलिए उस दिन मंडल ने अपना कोई कार्यक्रम नहीं करते हुए, मोहर्रम को ही इसमें शामिल किया।