नई दिल्ली : विजय माल्या के देश से भाग जाने पर सीबीआई की भूमिका संदेह के घेरे में है. हाल ही में सीबीआई की ओर से दावा किया गया था कि विजय माल्या को लेकर लुक आउट सर्कुलर में बदलाव कर उन्हें देश में रोके जाने की बजाए सिर्फ निगरानी रखने का निर्णय उनकी भूल थी.  सीबीआई ने मुंबई पुलिस को लिखित में तर्क देते हुए कहा था कि पहला लुक आउट सर्कुलर गलती से जारी कर दिया गया है. वहीं माल्या को रोके जाने की आवश्यक्ता नहीं है.

सीबीआई ने कहा गलती से जारी हुआ पहला सर्कुलर
सीबीआई की ओर से पहला लुक आउट सर्कुलर अक्तूबर 2015 को जारी किया गया था. लुक आउट सर्कुलर जारी करने के लिए भरे जाने वाले फार्म में लिखा गया था कि इस व्यक्ति को भारत छोड़ने से रोका जाए. वहीं दूसरा सर्कुलर 24 नवम्बर 2015 को जारी किया गया. ये सर्कुलर कवरिंग लेटर के साथ मुंबई पुलिस की भेजा गया. इसमें लिखा था कि इस व्यक्ति की आने व जारे की सारी सूचना उपलब्ध कराई जाए.
सीबीआई कर रही है प्रत्यार्पण का प्रयास 
04 महीने के बाद माल्या 2 मार्च 2016 को देश छोड़ कर चले गए. तब से अब तक सीबीआई माल्या को वापस लाने के लिए यूके से प्रत्यार्पण का प्रयास कर रही है. गौरतलब है कि 28 फरवरी को माल्या को कर्ज देने वाले भारतीय स्टेट बैंक ने भी कानूनी सलाह लेने के बाद न्यायालय में माल्या को देश से बाहर जाने पर रोक लगाने की मांग की थी. लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

पहले कहा था कि माल्या को रोकने के पर्याप्त आधार नहीं 
13 सितम्बर को पीटीआई की एक खबर के अनुसार सीबीआई ने कहा कि लुक आउट सर्कुलर को डाउनग्रेड करना उनके निर्णय में चूक थी. वहीं दो दिन पहले सीबीआई ने कहा था कि यह माल्या को देश में रोकने के लिए पर्याप्त आधार न होने के चलते ही लेटर ऑफ सर्कुलर में बदलाव किया गया था.