मुंबई । दुनिया की मशहूर कंपनी आर्सेलर मित्तल समूह  की अगुवाई वाली क्रेडिटर्स की कमेटी ने केएसएस पेट्रॉन के लिए रॉयल पार्टनर्स इनवेस्टमेंट फंड का रिजॉल्यूशन प्लान खारिज कर दिया है। केएसएस पेट्रॉन के लिए केवल इस फंड ने बोली लगाई थी। क्रेडिटर्स की कमेटी ने अब स्ट्रेस्ड एसेट की कुर्की के लिए बैंकरप्सी कोर्ट में आवेदन दिया है। सोमवार को केएसएस पेट्रॉन के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से एडवोकेट जितेंद्र कुमार ने कहा कि कमेटी ने इस कंपनी को कुर्क करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा, 'हम इसके लिए कोर्ट से मंजूरी मांग रहे हैं।' मॉरीशस के रॉयल पार्टनर्स इनवेस्टमेंट फंड ने कंपनी को खरीदने के लिए बोली सौंपी थी। इस फंड का पक्ष रखने वाले एक वकील ने कहा, 'हम अपनी बिड खारिज किए जाने को चुनौती देंगे। हम क्रेडिटर्स की कमेटी बनाए जाने को भी चुनौती देंगे क्योंकि कंपनी का 99 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा एक लेंडर के पास है और इस मामले में वह रिलेटेड पार्टी भी है।'
ईमेल से भेजे गए सवाल के जवाब में फंड के एमडी मयूर घुले ने कहा कि कमेटी की रूलिंग को एनसीएलटी में चुनौती दी गई है। उन्होंने मामला अदालत में होने का हवाला देकर और जानकारी देने से मना कर दिया। कंपनी के क्रेडिटर्स की कमेटी में करीब 99.76 प्रतिशत वोटिंग पावर रखने वाली आर्सेलर मित्तल इंडिया की नजर एस्सार स्टील पर भी है। इस कंपनी के चेयरमैन लक्ष्मी मित्तल के पास केएसएस पेट्रॉन की पैरेंट कंपनी काजस्ट्रॉय सर्विस में 33 प्रतिशत पर्सनल स्टेक था, जिसे उन्होंने एस्सार स्टील के लिए बोली लगाने से पहले बेच दिया था। दरअसल डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों के प्रमोटर दूसरी कंपनियों के लिए बोली नहीं लगा सकते। मित्तल के इस कदम को हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पर्याप्त नहीं माना और पिछले साल अक्टूबर में उसने कहा था कि उत्तम गाल्वा और केएसएस पेट्रॉन का बकाया चुकाया जाए, जो 7469 करोड़ रुपये का है। इसमें केएसएस पेट्रॉन पर बकाया 1647 करोड़ रुपये शामिल हैं। कोर्ट ने कहा था यह बकाया चुकाने पर ही एस्सार के लिए बोली लगाने लायक हुआ जा सकेगा।