चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं। कामदा एकादशी को भगवान श्रीविष्णु का उत्तम व्रत कहा गया है। इस बार यह व्रत 15 अप्रैल, मंगलवार को है। इस व्रत की विधि और महत्व इस प्रकार है-


ये है व्रत विधि
- कामदा एकादशी की सुबह स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान श्रीविष्णु की पूजा करें। 
- भगवान विष्णु को फूल, फल, तिल, दूध, पंचामृत आदि पदार्थ अर्पित करें। आठों प्रहर निर्जल (बिना पानी पिए) रहकर विष्णु जी के नाम का स्मरण एवं कीर्तन करें।
- एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन एवं दक्षिणा का बड़ा ही महत्व है। अत: द्वादशी तिथि (16 अप्रैल, मंगलवार) को ब्राह्मणों को भोजन करवाकर दक्षिणा सहित विदा करने के बाद ही भोजन करें। 
- इस प्रकार जो चैत्र शुक्ल पक्ष में कामदा एकादशी का व्रत रखता है, उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है।

ये है कामदा एकादशी का महत्व
- धर्म ग्रंथों के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत के पुण्य से जीवात्मा को पाप से मुक्ति मिलती है। 
- यह एकादशी कष्टों का निवारण करने वाली और मनोवांछित फल देने वाली होने के कारण फलदा और कामना पूर्ण करने वाली होने से कामदा कही जाती है। 
- इस एकादशी की कथा व महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने पाण्डु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। 
- इससे पूर्व राजा दिलीप को यह महत्व वशिष्ठ मुनि ने बताया था।