खरतूम: सूडान में बशीर शासन के पतन के बाद अपना आंदोलन जारी रख रहे लोगों ने नए सैन्य शासकों से मांग की है कि वे एक असैन्य सरकार की स्थापना करें. वहीं विदेश मंत्रालय ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन के लिए समर्थन मांगा है. उमर अल बशीर के सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद एक सैन्य परिषद ने सत्ता संभाली है और नए फौजी हुक्मरानों पर दबाव डालने के लिए हजारों की तादाद में प्रदर्शनकारी खारतूम के सैन्य मुख्यालय में डेरा जमाए हैं.

प्रदर्शनकारियों के मंच ‘अलायंस फॉर फ्रीडम ऐंड चेंज’ के एक बयान के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे 10 लोगों के एक शिष्टमंडल ने शनिवार देर रात सैन्य शासकों से वार्ता के दौरान अपनी मांगें पेश की. बयान में बताया गया कि अलायंस के नेताओं में से एक उमर अल-दगीर ने कहा कि पूर्ण रूप से असैन्य सरकार के गठन समेत ‘‘अपनी मांगों के पूरे होने तक हम अपना धरना जारी रखेंगे.’’

बाद में सैन्य परिषद ने राजनीतिक पार्टियों के नुमाइंदों से मुलाकात की और उनसे देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए एक ‘स्वतंत्र व्यक्ति’ के नाम पर सहमत होने की अपील की. सैन्य परिषद के सदस्य यासिर अल अता ने कई राजनीतिक पार्टियों से कहा कि हम स्वतंत्रता, न्याय और लोकतंत्र पर आधारित एक असैन्य शासन की स्थापना करना चाहते हैं.

उन्होंने पार्टियों से असैन्य सरकार में शामिल होने वाले व्यक्तियों पर सहमत होने का अनुरोध किया. प्रदर्शनकारियों ने जोर दिया कि असैन्य प्रतिनिधियों को सैन्य परिषद में शामिल होना चाहिए और रोजमर्रा के कामकाज के लिए पूर्ण असैन्य सरकार की मांग की.

इस बीच, विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की कि वे सूडान के लोकतांत्रिक परिवर्तन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सैन्य परिषद का समर्थन करें. सूडान में अमेरिका के राजदूत स्टीवन कौटिस और सैन्य परिषद के उप प्रमुख की रविवार को मुलाकात हुई थी जिसके बाद सूडान के नए हुक्मरानों और प्रदर्शनकारी नेताओं के बीच बातचीत हुई.

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने सूडान में सरकार चलाने के लिए बनी अस्थायी सैन्य परिषद के समर्थन में बयान जारी किए हैं. सऊदी अरब के बादशाह शाह सलमान ने सूडान के लिए एक पैकेज का आदेश दिया है जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद, गेहूं और दवाइयां शामिल हैं.