मनीषा मामले में हिट विकेट हुई भाजपा

बडे पदाधिकारियों के आचरण पर गंभीर सवाल

अजीत मिश्रा

अनूपपुर। कोतमा जनपद अध्यक्ष मनीषा पाव के विरुद्ध तथाकथित रुप से भाजपा द्वारा लाया गया अविश्वास जाहिरा ब्लेकमेलिंग , धमकी,निचले स्तर की राजनीति से अधिक कुछ नहीं है। शहडोल संभाग की एक मात्र सामान्य सीट ,जहाँ भाजपा के कलफदार कुर्ता पाजामा चटकाते कद्दावर नेताओं की पूरी फौज है, वहीं भाजपा हिट विकेट हो गयी। मनीषा पाव भाजपा की थी,भाजपा के कुछ नेताओं के आचरण के कारण उसने कांग्रेस का दामन थाम लिया। चित्रकूट हारने,मूंगावली - कोलारस विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खडी भाजपा के लिये यह बडा झटका है तो कांग्रेस के लिये मनोबल बढाने वाली घटना।

  कोतमा जनपद अध्यक्ष मनीषा पाव के विरुद्ध अविश्वास भाजपा के लोगों ने लाया लेकिन अविश्वास प्रस्ताव पर वोट करने एक भी सदस्य नहीं पहुंचा। चर्चा सरगर्म है कि भाजपा के पदाधिकारियो व कुछ नेताओं की आए दिन नाजायज मांगे न मानने के कारण अविश्वास का संकट गढा गया। यह मनीषा को ब्लैकमेल करने,उसे धमकाने से अधिक कुछ नही था। इसकी पुष्टि सदस्यों की अनुपस्थिति से हो गयी। अपनी ही पार्टी के नेताओं के आचरण से नाराज मनीषा ने कोतमा विधायक मनोज अग्रवाल की उपस्थिति में कांग्रेस ज्वाईन कर लिया।

  भाजपा जिलाध्यक्ष आधाराम वैश्य असफल रहे।

 कहने को तो अनूपपुर जिले के कोतमा विधानसभा में जिले की पूरी लगभग भाजपा मौजूद है, जहां भाजपा जिला अध्यक्ष आधाराम वैश्य का निवास इसी विधानसभा के राजनगर में हैं, तो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अनिल गुप्ता,पूर्व विधायक जुगुल किशोर गुप्ता,दिलीप जायसवाल, राजेश सोनी ,ब्रजेश गौतम, अजय शुक्ला,लवकुश शुक्ला जैसे भाजपा के कद्दावर नेता इसी विधानसभा में निवास करते है यहां तक की युवा प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष सुनील गौतम, महिला मोर्चा की जिला अध्यक्षया सुनीता सिंह का निवास भी इसी विधानसभा में हैं पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा जिला अध्यक्ष आधाराम वैश्य के टीम अधिकांश महत्वपूर्ण सदस्य कोतमा विधानसभा में ही निवासरत है उसके बावजूद भी कोतमा जनपद अध्यक्ष मनीषा पाव जो भाजपा की थी, भाजपा का दामन छोड़ कांग्रेस का दामन थाम लिया। 

इन पर भी उठे सवाल

एक ओर जहां लगभग पूरा जिला भाजपा कोतमा विधानसभा अंतर्गत निवास करती है तो दूसरी तरफ जिला मुख्यालय प्रदेश उपाध्यक्ष रामलाल रोतेल, विंध्यविकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रामदास पुरी जैसे बडे नेता भी इस जिले में निवास करते है। उसके बावजूद भी भाजपा की एक बड़ी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस में शामिल कराने में सफल रहे। तो इन सभी बड़े नेताओं की पार्टी के प्रति प्राथमिकता पर सवाल उठना लाजमी है।

एक ओर जिला भाजपा इस मामले को संभालने मे विफल रही तो दूसरी ओर कांग्रेस को भाजपा पर मनीषा पाव के माध्यम से हमला करने का नया हथियार मिल गया है। विधानसभा चुनाव 2018 के पहले मनीषा पाव के पार्टी छोडने से भाजपा बैकफुट पर है और कांग्रेस के खेमे में खुशी का महौल है देखना है कि मनीषा पाव के पार्टी से हटने से भाजपा को आने वाले विधानसभा में कितना खामियाजा उठाना पडे़गा।