नेता या ब्लैकमेलर...जैतहरी चुनाव से उठे सवाल ,लालची प्रबंधन से कार्यकर्ता खिन्न
 जैतहरी ,जिला अनूपपुर मे १७ जनवरी को ८५ % से अधिक मतदान के बाद नगरीय चुनाव में शामिल सभी प्रत्याशियों का भाग्य मशीन में सीलबन्द हो गया। २० जनवरी को परिणाम भाजपा विरुद्ध भाजपा के बीच लगभग तय है । परिणाम भाजपा की सुनीता जैन या इसी दल से टिकट न मिलने पर बागी हुई नवरत्नी शुक्ला के पक्छ मे जाता दिख रहा है।कांग्रेस की गीता सिंह बिसाहूलाल सिंह की रणनीति- पराक्रम के बूते हैं।परिणाम चाहे जो हो..समय रहते इस चुनाव ( जो लगभग प्रत्येक चुनाव मे कमोबेश कम ज्यादा रहती है।) में वरिष्ठ नेताओं, चुनाव प्रबंध समिति के आचरण पर चर्चा जरुर होनी चाहिए । क्योंकि प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, संगठन के सभी जिम्मेदारों को समय समय पर गद्दारी ,ब्केकमेलिंग की सूचना कर्मठ,समर्पित कार्यकर्ताओं द्वारा दी जाती रही है।
स्वच्छ छवि पर धनबल भारी
 भाजपा ने सर्वे व वरिष्ठ नेताओं से चर्चा उपरान्त नगर के सर्वाधिक बेहतर कार्यकर्ता सुनीता प्रदीप जैन को टिकट दी। जो जैतहरी मूल के एक कद्दावर नेता को अच्छा नहीं लगा। आनंद अग्रवाल जैसे नव धनाढ्य को प्रत्याशी बनाने मे असफल इन महाशय ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के विरुद्ध जो मोर्चा खोला वह प्रदेश के सह संगठन मंत्री अतुल राय,मंत्री राजेन्द्र शुक्ला,संजय पाठक व यहाँ तक की स्वत: मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष की समझाईश के बाद भी नहीं रुका। दिखावे के लिये इक्के दुक्के अवसर पर इन्होने मंच तो साझा किया लेकिन इनके तमाम समर्थक अपनी पार्टी की दुर्गति करते रहे। परिणाम यह हुआ कि अपेक्षाकृत सरल चुनाव निर्दलीय प्रत्यशियों के साथ फंस गया।

पैसे की मची लूट-
 प्रत्याशी के नजदीकियों व सूत्रों के अनुसार  जिला संगठन व चुनाव संचालन समिति के कुछ सदस्यों के लिये ऐसे चुनाव पैसा कमाने का माध्यम बन गया है। पैसे की यह लूट लोकसभा उप चुनाव से शुरु होकर अमरकंटक, पसान मे देखने को मिला। कोतमा ,बिजुरी मे कमान किसी अन्य के हाथों मे होने से  कुछ हद तक स्वच्छ रहा। जैतहरी मे पैसों की जमकर बन्दरबांट की गयी। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने एक रुपये तक न मिलने का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल किया। दशा इतनी खराब हुई कि अन्तिम दो दिनों मे कार्यकर्ता असहाय दिखे तो कुछ दिग्गज नेता धन बटोरने मे लगे रहे। सूत्र बताते है भाजपा में निर्मल बाबा के नाम से विख्यात एक नेता की क्रपा तब बरसी जब उन्होने दो लाख ऐंठ लिये। ऐसा कमोबेश हर चुनाव मे होता रहा है।  आरोप कितने सही हैं ,यह जांच का विषय है।
 दो बागियों को मिला प्रश्रय-- 
विधायक रामलाल रोतेल के समीपी अध्यक्ष प्रत्याशी को हराने के लिये दो बागियों को न केवल खडा किया गया बल्कि उन्हे धन भी दिया गया। भीखम राठोर भाजपा से पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रहे हैं, जिनका राठोर समाज मे बडा होल्ड माना जाता है।नवरत्नी विजय शुक्ला ,जिसने भाजपा से दावेदारी की,टिकट न मिलने पर इन्होने अपने घर से भाजपा का कार्यालय बन्द कर सामान तक बाहर फेंक दिया था। इनके लिये जातिगत समीकरण सेट कर  जिताने का हर संभव कार्य पार्टी की कीमत पर किया गया।
 जीतने पर भाजपा में लाने का दावा-
 विजय नवरत्नी शुक्ला को जिताने व भाजपा को हराने के लिये जिलाध्यक्ष- संगठन मंत्री द्वारा नियुक्त कुछ कद्दावर वार्ड प्रभारियों तथा प्रदेश स्तर के पदाधिकारी ने ऐंडी चोटी का जोर लगाया। अब इनका दावा है कि बागी नवररत्नी शुक्ला के जीतने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चोहान की उपस्थिति मे भाजपा की सदस्यता दिलाई जाएगी। इससे भाजपा खेमे मे हडकंप है । भाजपा को पराजित कर विरोधी को भाजपा खेमे मे लाना मतलब पार्टी से स्वयं को बडा साबित करने की कवायद ही है। यदि पार्टी मे यह नयी परंपरा शुरु हो गयी तो इसे खतरनाक व पतनशील परंपरा ही माना जाएगा ,जो समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल तोडने व गद्दारी को बढावा देने वाला होगा।
गद्दारों को करें चिन्हित-
 कांग्रेसी नीतियों से प्रभावित कुछ वरिष्ठ नेताओं के इस आचरण के विरुद्ध बडे आपरेशन की जरुरत है। इन्हे कठोरता से यहीं रोकने की जरुरत है। आने वाले समय मे धनपुरी,अनूपपुर नगरपालिका चुनाव व तत्काल बाद विधानसभा  चुनाव होने हैं। संगठन मे कसावट के साथ प्रदेश के आला नेताओ को भाजपा की सडीगली ,दूषित - बीमार टहनियों को छांटने ,उपचार करने की जरुरत है ,ताकि पार्टी के कंधों पर सवार कोई नेता पार्टी को लात मारने की हिम्मत न कर सके।
 कमजोर संगठन से मिशन २०१८ खतरे में-
कहने को भाजपा संगठन के जिलाध्यक्ष आधाराम वैश्य हैं लेकिन वास्तव में पूरी कमान जैतहरी व कोतमा के दो नेताओं के हाथों में सीमित है। दोनो ही नेता कोतमा विधानसभा का प्रत्याशी बनना चाहते हैं । स्वत: जिलाध्यक्ष आधाराम वैश्य इस दॊड में बतलाए जाते हैं । इन्हे टिकट मिले- न मिले , संगठन मे जमावट  अपने कद से निचले तबके के लोगों को जोड कर की गयी है। गुटबाजी इस कदर फैलाई गयी है कि कार्यक्रमों, प्रदेश नेताओं के आगमन तक की सूचना छुपाई जाती है। जाहिर है कमजोर, गुटबाज संगठन के कारण भाजपा का मिशन २०१८ खतरे में बतलाया जा रहा है।

भाजपा की हार तय पार्टी नेताओं के गुपचुप बोल,राम के सहारे रही गीता  
भाजपा के कुछ नेता दबी जुबान ये कहते नजर आये की पार्टी की हालत जैतहरी चुनाव में ख़राब है और चुनाव बड़ा मुश्किल है भाजपा इस पूरे चुनाव में कांग्रेस से कही लड़ती दिखाई नहीं दी पूरे चुनाव के दौरान पार्टी अपने नेताओं से ही जूझती दिखाई और आखिर कार पार्टी के कुछ ईमानदार कार्यकर्त्ता हार मान कर भी पार्टी के काम में तो लगे रहे पर उन्हें भी पता था की हमारी मेहनत भितरघातियों के सामने कहीं नहीं टिकने वाली फिर भी जोर आजमाइस जारी रही वही दूसरी तरफ कांग्रेस ने सायद पहले ही इस चुनाव में हार मान ली थी सूत्र बताते है जिस दिन गीता सिंह ने नामांकन दाखिल किया उसी दिन कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने अपनी हार मान ली थी मजबूरन उनहोंने अपना तरकस राम के कन्धों पर रख दिया और पूरे चुनाव में राम ही नजर आये पर जनता है सब जानती है बहरहाल हमारे करीबी सूत्र जो राजनीत को काफी करीब से जानते है बताते है की राम अगर मैदान में होते तो चुनाव कांग्रेस के पाले में था पर फिर कांग्रेस पांच साल का बनवास झेलना नहीं चाहती थी इसलिए राम अग्रवाल को चुनावी मैदान से बाहर रखा गया बहर हाल जो भी हो कल आने वाले चुनाव कई नेताओं का राजनैतिक भविष्य तय करेंगे ये तो तय है