भाजपा में आन्तरिक कलह उफान पर 2018-19 के लिए खतरा बढ़ा 
अनूपपुर / इस समय शहडोल  संभाग में भारतीय जनता पार्टी की आंतरिक कलज उफान पर है अचानक से ही संभाग के संगठन मंत्री संतोष त्यागी के विरोधी मुखर हो कर एक मुहिम के तहत उनका विरोध करते दिख रहे है जिस तरीके से भाजपा के अंदर से ही संतोष त्यागी के विरोध के स्वर मुखर हो रहे है ऐसा लगता है कि संभागीय संगठन मंत्री संतोष त्यागी को पार्टी के  विशेष गुट द्वरा जानबूझ कर  साजिश के तहत टारगेट किया जा रहा है ? जिस तरह से छोटी छोटी बेसिर पैर की बातों को तूल देकर संगठन मंत्री के विरुद्ध माहौल बनाया जा रहा है ,लोगों को त्यागी के पूर्व वर्ती मनोज सरैया का कार्यकाल याद आ गया। उस वक्त भी संभाग में भाजपा के एक गुट पर सरैया के विरुद्ध माहॊल बनाने व उन्हें हटाने की योजना पर कार्य करने के आरोप लगे थे। जबकि चुनावी एवं अनुशासन के नजरिये से सरैया का कार्यकाल सफल माना गया था।
शहडोल लोकसभा उपचुनाव मे जैतहरी मे संगठन को मजबूती देने वाले संतोष त्यागी को संभागीय संगठन मंत्री बनाया गया। उनके मार्ग दर्शन में अमरकंटक, बिजुरी, कोतमा,शहडोल, पाली नगरीय निकाय चुनाव जीते तो पसान- जैतहरी के हार का ठीकरा उनके चहेतो और उनकी कार्यशैली को ही जिम्मेदार ठहराया गया  बांधवगढ़ विधानसभा तथा शहडोल उपचुनाव मे विजय पाने के बाद आगामी महीनों मे धनपुरी, अनूपपुर नगरीय निकाय तथा विधानसभा चुनाव जीतना बडी चुनौती होगी। संगठन के हितों को लेकर अपेक्षाकृत सख्त त्यागी की कार्यशैली उनकी भाषाशैली के कारण विवादास्पद रही है। कहीं यह संगठन की ताकत बनी तो कुछ जगहों पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी का कारण बन गयी।
मण्डल स्तर पर कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क रखने वाले त्यागी सुबह से देर रात्रि तक कार्य करने, क्षेत्र मे निरंतर दौरे के लिये जाने जाते हैं।लेकिन जिस तरह के आरोप उनपर लगे,वे पार्टी जन्य ही थे।  त्यागी की कडक शैली से पार्टी के क्षत्रकों की जडें हिलने लगी,नये कार्यकर्ताओं के आगे आने से योजनाबद्ध तरीके से विवाद खडा किया गया। आन्तरिक सूत्र इसे एन्टी ब्राम्हण लाबी की करतूत करार देते हैं। जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पूर्व ऐसे विवाद इस लिये खडे किये जाते हैं, ताकि अपना दबदबा स्थापित रखा जाए। संभाग की एकमात्र सामान्य सीट पर नये चेहरे की तळाश, जिला संगठनो- नगरीय चुनाव मे दर किनार किये गये स्थापित नेताओं की संलिप्तता को विवाद का कारण माना जा रहा  है। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारियो को विवाद में घसीटने की कोशिश हो तो किसी को आश्चर्य नही होगा। पार्टी के समक्ष 2018-19 का चुनाव बडा लक्ष्य है। उससे पूर्व अनुशासन हीनता,गुटबाजी से हो रहे नुकसान को रोकना बडी चुनॊती है।