आश्वासन की ढोल बजे तो आवाज दूर तलक तक जाए?
राजकमल पांडे
प्रशासनिक सेवा पर नवागत बहादुर शाह आये तो दिमाग में तफ़्तीश हुआ कि शहर के टेढ़ी रीढ़, टेढ़े नेता और निठल्ला प्रशासनिक नुमाईंदे सीधे हो जाएंगे। अपितु जब 26 जनवरी को बहादुर शाह के कारिंदो ने बहादुर शाह के लिए टेबल में काजू कतली प्रस्तुत किया और बच्चों को बूंदी की जगह बजट न होने का आश्वासन परोसा तो मेरे फोन की घंटियां बजनी लगी। इस उद्देश्य से की फिर मर्म में आघात हुआ है। शहर के गलियों का खाख झांते हुए जब कलेक्ट्रेट सभागार में पहुंचा तो पाईजी! सवालों की तख्तियां टांगे कुर्सी पर बैठे पाए गए। मुझे देखते ही कविवर! नमस्कार करते हुए मेरे पास आये। और आते ही कहने लगे कविवर! देखिये तो भला पूर्व कलेक्टर के.के. खरे ने जो फलदार वृक्ष लगाए थे, वो आज कांटेदार वृक्षो में तब्दील हो गए हैं। उधर बहादुर शाह के आगमन में शहर की जनता में एक नई उम्मीद की किरण जागी थी। अपितु अफ़सोस बहादुर शाह भी कई जनम से सोए नही थे तो आते ही लम्बे-लम्बे खर्राटे लेने लगे। न तो फ्लाई ओवर ब्रिज के निर्माण में कोई पहल कर रहे हैं और ना हि शहर के विस्तार पर अपनी भूमिका अदा कर पा रहे हैं।
पाईजी! तुमको पता यहां के प्रशासनिक सेवा में जो गुरुत्वाकर्षण वाली कुर्सी है, वो बड़ा ही सुस्त कुर्सी है; इसमे बैठने के बाद बड़े-से-बड़ा जोशीला अधिकारी चिपक कर सुस्त हो जाता है। पूर्व की सरकार जो जगत मामा के नाम से सुप्रसिद्ध थे उन्होंने ने वेंकटनगर से अनूपपुर पहुंच मार्ग के लिए 36 किलोमीटर का जो पजामा बनवा रहे थे उसमे 2 किलोमीटर का नाड़ा डालने का काम देश की पुरातन वंशवादी पार्टी को पराजय के बाद सौप दिया था। अपितु सरकार आते ही उन्होंने ने जनता की थाली में दनादन आश्वासन परोसना प्रारम्भ कर दिया। हमारे शहर के विकास पुरुष जब विधायकी पद पाया तो लगा बस कुछ ही दिनों में एक चटियल मैदान सामने होगा फ्लाई ओवर ब्रिज बन जाएगा, सड़के बन जाएगी, सब्जी मंडी का विस्तार हो जाएगा, शहर के सीने में बढ़ रहे निरंतर अतिक्रमण रुक जाएगा,बस स्टैण्ड बन जायेगा, अधूरा खेल मैदान का निर्माण शुरू हो जाएगा, मरणशील व डॉक्टरों के भाव वाला जिला अस्पताल 200 बिस्तर में तब्दील हो जाएगा  विशेषज्ञों की भरमार होगी, और-तो-और जर्जर तुसली कॉलेज पीजी कॉलेज के स्वरूप में आ जाएगा। लेकिन विकास पुरुष तो आश्वासन के सरताज निकले। 42 दिनों के बाद जब विकास पुरुष अपने विधायकीय क्षेत्र में कदम रखा तो कार्यकर्ता स्वागत कक्ष में खड़े होकर ढोल, मंजीरा व आतिशबाजी करते हुए स्वागत किया। जो बरसो विधायक से मुँह फुलाये घूम रहे थे, पद पे आते ही वह भी अपनी चोंच आगे कर विधायक के साथ सेल्फी लिया। विधायक किसी-न-किसी वजह से मायूस थे, इसलिए आते ही अपने पान-सितारा होटल में प्रवेश किया। पाईजी! हंसते हुए बोले मब्बल हद्द है।
कविवर! अच्छा आप ये बताइये जब जनता ने अपना मत देकर विधायक चुन दिया है, तो उनके अधिकार-विकास से कैसे वंचित किया जा सकता है। जनता के वस में होता तो वो अपना मत देकर मंत्री पद भी दिला देते। जितना था, उन्होंने किया ये तो कुर्सी का बड़ा लोभिपन है कि आते ही आपने झूंठे आश्वासन परोसना प्रारम्भ कर दिया। अब देखिए तो भला वेंकटनगर से अनूपपुर पहुंच मार्ग-क्षमा 36 किलोमीटर का पजामा जो बन चुका है और 2 किलोमीटर का नाड़ा जो पजामा में डालना है वह नवागत विधायक के जिम्मे है। जिस पर विधायक को पहल करना था, उस पर अब प्रशासन कामचलाउ बनाने वाली है-क्यूं?
अरे पाईजी! सरकार जाने के बाद शहर के जिन पार्टी कार्यकर्ताओं के पजामा खिसकर घुटने के ऊपर चला गया व साथ ही आंखों में मोतियाबिंद हो गया था। 42 दिनों की अज्ञातवास में विधायक महोदय ने अपनी सरकार से कह कर फुल साइज का पजामा व विकास को देख लेने योग्य चश्मा वितरण करवा दिया है। ताकि वह देखे की कैसे मंत्री पद ने मिलने की खीझ विकास का गला घोट कर निकालते हैं। जो विधायक 2 किलोमीटर के सड़क निर्माण हेतु अपने सरकार से बजट का दरख्वास्त नही कर सकते उनसे विकास की क्या उपेक्षा की जा सकती है। जिला प्रशासन को उक्त सड़क निर्माण के लिए खुद पहल करना पड़ा। और शहर के जिन चन्द्रगुप्त मौर्यों ने ये अपवाह फैलाया था कि फ्लाई ओवर ब्रिज के लिए मुआबजा राशि बस स्वीकृत हो गया है, तो वो मुआबजा राशि कहां है। उधर जिला प्रशासन अपने बस्ते से शहर के विस्तार हेतु जो बीरबली फीता निकाला था, उस पर नगर के पूर्व अधिराज ने रोक लगा दिया। अतिक्रमण हटाने का कार्य रुक गया। जिला प्रशासन भी समझ गई कि यहां केवल कुर्सी संभालो बांकि के बर्बादी के लिए यहां के नेता ही पर्याप्त हैं। उससे भी बड़ी बात अतिक्रमण हटाने में प्रशासन का हाथ पकड़ने वाले भी उन्हीं के पार्टी के कार्यकर्ता है। पाईजी-दुष्यंत कुमार जी ने क्या खूब लिखा है कि-
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नही 
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदली चाहिए 
मेरे सीने में नही तो तेरे सीने में सही 
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
नमस्कार चलता हूं, पाईजी! मिलते है फिर कहीं।