शासकीय महाविद्यालय पुष्पराजगढ  में हिन्दी विषय पर ‘‘कार्यषाला’’ सम्पन्न 
 
‘‘निज भाषा अहं, सब भाषा को मूल’’ 
 
अनुपपुर । आदिवासी अंचल संचालित शासकीय महाविद्यालय पुष्पराजगढ़ में ‘‘ में दिनांक 02.02.2019 शनिवार को  अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में हिन्दी भाषा में वतर्नी अषुद्धियॉ’’ विषय पर एक कार्यषाला आयोजित की गई। जिसके मुख्य अतिथि डॉ. परमानंद तिवारी प्राचार्य अग्रणी महाविद्यालय अनूपपुर, विषिष्ट अतिथि पी.एस. पटटावी प्राचार्य कन्या षिक्षा परिसर पुष्पराजगढ़, प्रो.ए.एल.
झारिया वरिष्ठ प्राध्यापक शास.महावि.पुष्पराजगढ़ रहे, एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की 
प्राचार्य डॉ.श्रीमती जे.श्याम ने की अध्यक्षता करते हुए डॉ.श्रीमती जे.श्याम ने जहां भाषा में वतर्नी एवं व्याकरण संबंधी त्रुटियों पर प्रकाष डाला, क्यों कि इस सुदूर अंचल में इस तरह की त्रुटियां बहुत आम है। भाषा की विकास यात्रा क्रमिक रूप से चलती हैं तथा वतर्नी संबंधी असुद्धियों की कई कारक है, इनका सुधार सावधानी के साथ सम्पन्न संवाद से हो सकता है। उक्त आषय पर विचार डॉ.परमानंद तिवारी ने व्यक्त की, तिवारी जी यहां विषय-विषेषज्ञ के रूप में उपस्थित हुए थे प्रो.ए.एल.झारिया ने भाषा की उत्पत्ति ‘‘अक्षर’’ से हुइ र् इस पर प्रकाष डाला और अक्षर को लिखने और बोलने में जानकारी की आवष्यकता है। 
कार्यक्रम का सफल संयोजन एवं संचालन हिन्दी विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.डी.पी.शार्मे 
जी ने की, डॉ. शार्मे ने इस क्षेत्र को विविध भाषाओं को अजायज घर कहां ? क्यों कि यहां पर 
बघेली, गोडी, छत्तीसगढ़ी, बुदेंली आदि भाषायों का संगम स्थल है।
कार्यक्रम में महाविद्यालय परिवार के विद्वान डॉ.प्रतिमा संत,डॉ. देवेन्द्र तिवारी, श्री देवेन्द्र सिंह 
बागरी, श्री संजीव द्विवेदी, श्री उत्तम सिंह, श्री सम्राट सिंह, श्री नारायण सिंह बघेल, श्री कैलाष 
लखेरा, कु. अमृता सिंह, श्री अखिलेष चन्द्रवंषी एवं महाविद्यालय के छात्र/छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यषाला की समाप्ति अपरान्ह 3 बजे डॉ.श्रीमती आर.के.मरावी सहायक प्राध्यापक अर्थषास्त्र 
के अभार प्रदर्षन के उपरांत राष्ट्रगान के साथ सम्पन्न हुआ।