मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले में   नान विभाग में अधिकारियों और राईस मिलों की सांठ गाँठ से परिवहन के नाम पर चार साल में लाखों रुपयों का फर्जीबाड़ा कर शासन को लाखों रुपयों का चूना लगाया गया  है।इस घोटाले के उजागर होने के बाद भी शासन और प्रशासन स्तर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह घोटाला भाजपा सरकार में  मेसर्स  नर्मदा राइस मिल कोहका  एवं मेसर्स मां नर्मदा राईस मिल कोहका जिला डिंडोरी  और भारत राईस मिल गणेशपुर जिला डिंडोरी के मालिकों  द्वारा किया गया  राईस मिलों के मालिकों  ने   सरकारी राशि को हड़पने के लिए नानविभाग के अफसरों को मोटा कमीशन दिया गया है।  लोकनिर्माण विभाग डिंडोरी से निगवानी स्थित वेयरहाउस की फर्जी  दूरी प्रमाण लगाकर नॉनविभाग से धान परिवहन के नाम पर चार सालों से लाखों रुपयों का भुगतान प्राप्त किया  है जबकि डिंडोरी -अमरकंटक मार्ग में छठवें किलोमीटर पर स्थित पीडब्लूडी के माइल स्टोन के आधार पर  मेसर्स नर्मदा राइस मिल  और मेसर्स  मां नर्मदा राइस मिल की वास्तविक दूरी निगवानी गोदाम से महज दस किलोमीटर  दूर है लेकिन  भुगतान किये गए बिलों में निगबानी गोदाम से मेसर्स मां  नर्मदा राइस मिल और मेसर्स नर्मदा राइस मिल कोहका की दूरी प्रमाण पत्र में 18  किलोमीटर दर्शाया गया इसी प्रकार भारत राइस मिल गणेशपुर की वास्तविक दूरी निगवानी गोदाम से 20  किलोमीटर होती है लेकिन निगवानी गोदाम से भारत राईस मिल गणेशपुर की दूरी 38  किलोमीटर दर्शाया गया है जबकि मड़ियारास गांव में खनूजा राइस मिल की दूरी निगवानी गोदाम से 13 किलोमीटर दूर है और मड़ियारास स्थित खनूजा राईस मिल , कोहका स्थित नर्मदा राईस मिल  से 5 किलोमीटर दूर  है तो यह सवाल अपने आप खड़ा होता है कि  निगवानी गोदाम से नर्मदा राईस मिल की दूरी 18 किलोमीटर कैसे हो सकती है ...?  और परिवहन के नाम पर सुनियोजित तरीके से दूरी का फर्जी प्रमाण पत्र के जरिये नान विभाग के जिम्मेदार अफसरों ने वर्ष 2015 -2016 में मेसर्स मां नर्मदा राईस मिल को अंकन 44,93095रूपये  वर्ष 2016 -2017  में अंकन  42,08908 रुपये और वर्ष 2016 -2017   मेसर्स नर्मदा  राईस मिल को 19,89428 रूपये  का भुगतान किया है  ।नान विभाग ने कमीशन लेकर फर्जी दूरी प्रमाण पत्र के आधार पर  भारत राईस मिल गणेशपुर जिला डिंडोरी को तीन वर्षों में लाखों रूपये का भुगतान किया है।                                                                                 इसी तरह डिंडोरी से शहपुरा की दूरी सरकारी रिकार्ड में 56 किलोमीटर दर्ज है लेकिन मेसर्स मां नर्मदा राईस मिल और मेसर्स नर्मदा राईस मिल के मालिकों ने डिंडोरी से शहपुरा का परिवहन के  भुगतान के लिए 50 किलोमीटर बताकर लिया गया इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि डिंडोरी से शहपुरा की दूरी कम दिखाने पर 4.77प्रति किलोमीटर प्रति क्विंटल दर से परिवहन का भुगतान होता है लेकिन जालसाजी कर शासन को चूना लगाने के लिए अफसरों की मिलीभगत से राईस मिल के मालिकों ने शहपुरा की दूरी 50 किलोमीटर दर्शाकर 6.45 की दर से प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर  भुगतान प्राप्त किया है.       
          इस प्रकार राइसमिल के मालिकों ने शासन को चूना लगाने के लिए फर्जीबाड़ा किया है और नानविभाग के अधिकारियों की सांठगांठ से चार सालों तक शासन को आर्थिक क्षति पहुँचाने का काम करते रहे है। इस मामले के उजागर होने के बाद तत्कालीन कलेक्टर अमित तोमर ने उच्स्तरीय जांच के आदेश जारी किये थे और राइस मिलों के मालिकों से वसूली के निर्देश दिए थे  लेकिन पूर्व  मामले की जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई है.