अस्पताल नही यमलोक है,संजीवनी की उम्मीद न लगाएं यहां बैठे यमराज है

एक बार फिर जिले को शर्मसार करता संजीवनी हॉस्पिटल अनूपपुर 
अनूपपुर - कहा जाता है कि हॉस्पीटल एक मंदिर और डॉक्टर उस मंदिर में विराजमान भगवान है पर जब इसके उलट हो जाये और हॉस्पिटल यमलोक और उसमें विराजमान यमराज हो जायें तो ऐसी घटनाएं तो होंगी ही पर धन्य वो भी है जिनकी देखरेख  की जिम्मेदारी थी और वो किसी से कम नही है जिनकी जिम्मेदारी बनती है जिले में इस तरह से संचालित अवैध दुकानों के देख रेख करने वाले, पूरा घटना क्रम आप को  बताएं पर उससे पहले अनूपपुर जिले में एक नही ऐसी सैकड़ों संस्थाएँ है जो आज नही तो कल इस जिले को शर्मसार करेंगी पर तब तक बहुत देर हो चुकी होगी मामला स्वास्थ्य विभाग भर का नही है चाहे वो लोन देने और उसकी एवज में मोटी ब्याज वसूलने वाले हों, या शिक्षा के नाम पर संस्थान बना छात्र छात्रोंओं को लूटने वाले या नौकरी के नाम पर बेरोजगारों को ठगने वाले एक न एक दिन सब इस अनूपपुर जिले के लिए नासूर साबित होंगे और तब जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ निकल लेंगे और रोते रह जायँगे इस जिले में रहने वाले
ताजा मामला इलाज की आड़ में एबॉर्शन जैसे कृत्य को अंजाम देने का है जहां जिले में संचालित संजीवनी हॉस्पिटल ने पता नही इससे पहले ऐसे कितने काले कारनामों को अंजाम दिया पर अब तक किसी को कानोकान भनक तक नही लगी
दरसल मामला 
अनूपपुर जिले के 19 वर्षीय युवती के साथ दुष्कर्म और सात माह बाद गर्भ ठहर जाने पर युवती का गर्भपात कराने संजीवनी हॉस्पिटल अनूपपुर लाया गया, डॉक्टरो द्वारा गर्भपात कराया गया। समय से पूर्व नवजात का जन्म हो हुआ।

समय से पूर्व नवजात के जन्म के कारण अधिक कमजोर होने पर संजीवनी हॉस्पिटल के डॉक्टरो ने योजना बनाते हुए अपने ही हॉस्पिटल के एम्बुलेंस से नवजात को जिला चिकित्सालय में भर्ती करते हुए नवजात के पिता का नाम फर्जी डाला गया।

इस बीच जिला चिकित्सालय में उपचार के दौरान ही 2 घंटे में नवजात की मौत हो गई। अस्पताल की सूचना पर पुलिस ने जांच प्रारंभ की लेकिन इस बीच 19 वर्षीय युवती ने कोतवाली पहुंचकर अपने साथ हुए दुष्कर्म और उसके बाद गर्भपात किए जाने की शिकायत दर्ज कराई।

पूरे मामले में पुलिस ने रविवार 8 मार्च को संजीवनी हॉस्पिटल के एम्बुलेंस को जब्त कर डॉक्टर एवं सहयोगी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

घटना 2 जून 2019 को जिला चिकित्सालय में नवजात की मौत की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच प्रारंभ की। जांच में जिला चिकित्सालय में नवजात को उपचार के लिए भर्ती करते समय उसकी मॉ के साथ उसके पिता अर्जुन यादव निवासी ग्राम निगवानी थाना रामनगर के नाम की पतासाजी की गई।

पुलिस को ग्राम बरतराई में अर्जुन यादव नाम के व्यक्ति को महीनो ढूढऩे में लगा और अंत में ग्राम पंचायत निगवानी के सरपंच ने अर्जुन नाम व्यक्ति के नही होने की पुष्टि की। जिसके बाद 22 जुलाई 2019 को 19 वर्षीय युवती ने कोतवाली अनूपपुर पहुंच अपने साथ हुए दुष्कर्म तथा जबरन गर्भपात किए जाने की शिकायत दर्ज की।

जिस पर कोतवाली पुलिस ने युवती की शिकायत पर आरोपी उमेश यादव पिता पंचू यादव 30 वर्ष निवासी बरतराई को 27 फरवरी को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद जिला मुख्यालय में संचालित संजीवनी हॉस्पिटल द्वारा गर्भपात करने के खेल का उजागर हुआ।

गर्भपात के लिए संजीवनी में कराया था भर्ती

युवती ने शिकायत में बताया की उमेश यादव उसके साथ नाबालिग से ही दुष्कर्म करता आ रहा है। लगातार दुष्कर्म के बाद उसका गर्भ ठहर जाने पर उसका गर्भपात कराने उसे संजीवनी हॉस्पिटल अनूपपुर में भर्ती कराया ।

पुलिस ने सबसे पहले आरोपी उमेश यादव को गिरफ्तार करते हुए उसके खिलाफ विभिन्न धराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला पंजीबद्ध करते हुए कोतवाली निरीक्षक प्रफुल्ल राय के निर्देशन में उपनिरीक्षक सोनम सोनी, सहायक उपनिरीक्षक महिपाल प्रजापति, आरक्षक विनोद पटेल, दिनेश बंधैया एवं धनीराम तिवारी ने ग्राम बरतराई से आरोपी उमेश यादव को गिरफ्तार किया।

आरोपी उमेश यादव को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस की पूछताछ पर उसने बताया की युवती के गर्भ के बाद उसी के मकान में किराए से रहने वाला झोलाछाप डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा निवासी जैतहरी से संपर्क किया गया, जहां ललित नारायण मिश्रा ने संजीवनी हॉस्पिटल के डॉक्टर से फोन में उमेश यादव की बात कराई और उसके बाद झोलाझाप डॉक्टर ललित नारायण मिश्रा ने अपनी कार से युवती का गर्भपात कराने उसे संजीवनी हॉस्पिटल अनूपपुर में भर्ती करा दिया गया। संजीवनी हॉस्पिटल के डॉक्टर  ने अपने सहयोगियो के साथ मिलकर युवती का गर्भपात किया, गर्भ में ठहरे सात माह के नवजात का समय पूर्व ही जन्म हो गया, इस दौरान नवजात की नाजुक हालत देखते हुए उसे जिला चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया जहां उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई 
अब आप सोचिए कि क्या कर रहा है अनूपपुर का जिला प्रशासन और स्वास्थ्य अमला ऐसा नही है कि इन संस्थानों की जानकारी इनको नही है पर इनकी सुस्त परस्ती की वजह से इन जगहों पर क्या खेल खेला जा रहा है इसकी भनक तक जिम्मेदारों को नही होती