लखनऊ, यूपी के बलिया में हुए गोलीकांड ने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में सरेआम गोलीबारी की गई है. इतना ही नहीं मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से फरार भी हो गया और तीन दिन बाद भी उसका पता नहीं है. इस बीच इस मामले में  सस्पेंड किए गए एसआई सदानंद यादव ने घटना के दिन पर कई अहम जानकारी दी हैं. सदानंद यादव ने बताया कि 15 अक्टूबर 2020 को ग्राम दुर्जनपुर में पंचायत भवन के सामने मैदान में टेंट लगाया गया था. वहीं पर एसडीएम महोदय द्वारा जगह निश्चित हुई थी. आरोपी अपने दल बल के साथ आया. आरोपी ने एसडीएम महोदय से यही सवाल उठाया कि आप यहां गंदगी में किस तरह से बैठे हैं? आप पीछे पीपल के पेड़ के नीचे लेकर चलिए. वहीं सभा होगी. एसडीएम साहब ने कहा कि यह निश्चित जगह है. यहीं पर बैठना है. किसी तरह आरोपी धीरेंद्र सिंह उर्फ डब्ल्यू माना और अपने पक्ष की औरतों को एक तरफ बैठाया और दूसरे पक्ष की औरतें भी बैठी हुई थीं. कोटा आवंटन के लिए पहचान पत्र की बात हुई. एक पक्ष  पहचान के रूप में आधार कार्ड और निर्वाचन कार्ड लेकर आया था. लेकिन आरोपी धीरेंद्र सिंह की तरफ से कोई पहचान पत्र लेकर नहीं आया था.

ऐसे शुरू हुआ झगड़ा
सस्पेंडें एसआई सदानंद यादव ने बताया कि एसडीएम साहब ने कहा कि जब पहचान पत्र होगा तभी मैं काम कर पाऊंगा. इस पर आरोपी धीरेंद्र प्रताप एसडीएम साहब से उल-जलूल बातें करने लगा. इसके बाद यह सब बातें सुनकर एसडीएम महोदय ने सभा स्थगित कर दी. सभा स्थगित होने के बाद सब लोग रोड की तरफ जाने लगे. इसी पर आरोपी पक्ष और दूसरे पक्ष में हाथापाई शुरू हो गई.  इस बीच, पुलिस मौके पर बीच-बचाव करने लगी. सदानंद यादव ने बताया कि धीरेंद्र सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल या रिवॉल्वर जो भी हो, लेकर आया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. धीरेंद्र ने तीन फायर किए. संयोग से किसी को गोली नहीं लगी. फायरिंग के दौरान डब्ल्यू जमीन पर गिर गया और उसका रिवॉल्वर या पिस्टल जमीन पर गिर गया. उसके बगल में इसका दोस्त खड़ा था और पिस्टल या रिवॉल्वर उठाकर उसने भी फायर करना शुरू कर दिया. उसी फायरिंग के दौरान जयप्रकाश उर्फ गामा पाल को गोली लग गई. सदानंद यादव ने बताया कि गोली लग गई तो भगदड़ मच गई. ऐसे में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आधी भीड़ को इधर-उधर किया और धीरेंद्र सिंह को पकड़ लिया. मैंने और क्षेत्राधिकारी धीरेंद्र सिंह को पकड़ कर पुलिस को दिया. फोर्स ने भीड़ को इधर-उधर हटाना शुरू कर दिया और घायल गामा पाल को गाड़ी से अस्पताल ले जाया गया.

धीरेंद्र के समर्थक पुलिस से छुड़ा ले गए
इसी दौरान आरोपी धीरेंद्र सिंह की पक्ष से करीब 1000-1200 लोग आए और तीनों सिपाही से धक्का-मुक्की करके धीरेंद्र को छुड़ा ले गए. अगर पुलिस वहां तत्परता नहीं दिखाती तो और भी हत्याएं हो सकती थीं. वह गलत आरोप लगा रहा है. क्योंकि उसके ऊपर किसी सत्ताधारी का हाथ है. वह किसी की बात नहीं सुनता है. आए दिन किसी से भी बवाल कर देता है. क्योंकि उसके ऊपर किसी सत्ताधारी का हाथ है. इस कारण से उसका मन बढ़ा हुआ है सदानंद यादव ने बताया कि किसी अधिकारी को भी हर जगह बदतमीजी करने लगता है. सामान्य तरीके से बात नहीं करता है. फोर्स काफी आ गई. भीड़ तितर-बितर हो गई. अगर पुलिस तत्परता नहीं दिखाती तो आरोपी और भी हत्याएं कर सकता था. आरोपी पर जब आरोप सिद्ध हो गया है तो अनर्गल लांछन लगाता है. गौरलतब है कि 15 अक्टूबर की इस घटना के बाद से ही मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह फरार चल रहा है. यूपी पुलिस ने सभी आरोपियों के पर इनाम बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दिया है. अब तक 8 नामजद और करीब 25 अज्ञात आरोपियों में सिर्फ 7 की गिरफ्तारी हुई है और इनमें भी सिर्फ दो ही नामजद हैं. बाकी नामजद आरोपियों का कोई पता ठिकाना नहीं है. साथ ही अब सभी आरोपियों र NSA और गैंग्स्टर एक्ट के तहत केस चलेगा. वहीं, दूसरी स्थानीय बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह खुलकर धीरेंद्र सिंह के समर्थन में आ गए हैं.