कारखाने, उद्योगों को श्रम कानूनों से तीन साल तक छूट, 46 जिंसों से हटाया मंडी शुल्क, वेयर हाउस-कोल्ड स्टोर बन सकेंगे उपमंडी स्थल
  
मथुरा। कोरोना से जंग के लिए देशभर में किए गए लाॅकडाउन में व्यापारी कराह रहा है। इस बीच योगी सरकार के कई निर्णय कारोबारियों, उद्यमियों के लिए राहत लेकर आए है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में 46 जिंसों पर से मंडी शुल्क हटाने का निर्णय लिया है। वहीं कारखानों, विनिर्माण प्रतिष्ठानों, इकाइयों को तीन साल तक श्रम कानूनों से छूट प्रदान की है। 
उत्तर प्रदेश व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष रविकान्त गर्ग ने बताया है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना महामारी के संकट से बाहर निकल कर प्रदेश में औद्योगिक क्रियाकलापों एवं आर्थिक गतिविधियों को पुनः पटरी पर लाने के लिए सरकार के ये निर्णय काफी अहम साबित होंगे। प्रदेश में औद्योगिक निवेश के नए अवसर खोलने के लिए अध्यादेश के माध्यम से समस्त कारखानों एवं विनिर्माण प्रतिष्ठानों, इकाइयों को प्रदेश में लागू श्रम अधिनियमों से 3 वर्ष के लिए छूट प्रदान की गई है। इस निर्णय के बाद लाॅकडाउन से चरमराए उद्योग, व्यापार जगत को खासी राहत मिलेगी। उद्यगों का संचालन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। 
श्री गर्ग ने बताया है कि प्रदेश में श्री योगी जी के नेतृत्व में सरकार द्वारा जारी इस अध्यादेश से प्रदेश में नए औद्योगिक निवेश, नए औद्योगिक प्रतिष्ठान व कारखाने स्थापित करना आसान होगा तथा वर्तमान में स्थापित पुराने औद्योगिक प्रतिष्ठानों, कारखाने, फैक्ट्री, बड़े स्तर पर व्यापार आदि को श्रम कानून की पेचीदगियों से राहत मिलेगी। इससे प्रदेश के उद्योगों को नई ऊर्जा मिलेगी। 
उन्होंने बताया कि प्रदेश मंत्रिमंडल ने कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश 2020 के माध्यम से प्रदेश में 46 फलों और सब्जियों को मंडी अधिनियम की अधिसूचना से अलग कर दिया है। इस निर्णय के बाद प्रदेश में 46 प्रकार के फल और सब्जियां जिसमें आम, सेव, हरी मटर, केला, अनार, मौसमी, अंगूर, पपीता, तरबूज, संतरा, पत्ता गोभी ,फूल गोभी, बैंगन, खीरा, कद्दू ,भिंडी, परवल, कटहल, करेला, किन्नू, खरबूज, शकरकंद, चीकू ,लीची, आवला, कुंदरू ,नाशपाती, जिमीकंद, टिंडा, बेर, माल्टा, आंडू, कुर्बानी सिंघाड़ा आदि पर मंडी शुल्क नहीं लगेगा। अब इन फल और सब्जियों का व्यापार निर्बाध रूप से पूरे प्रदेश में हो सकेगा।
मंडी अधिनियम में किए गए अन्य संशोधनों के माध्यम से विशिष्ट श्रेणी के लाइसेंस प्रक्रिया के माध्यम से मंडी परिषद के बाहर भी किसानों से उसकी उपज की खरीद की व्यवस्था हो सकेगी। नए निर्णय के बाद वेयर हाउस, साइलो, कोल्ड स्टोरेज जैसे स्थानों को उप मंडी स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए आसानी हो सके।