अतिथि विद्वानों के लिए नई नीति बनाने के निर्देश, मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री को सौंपी जिम्मेदारी

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के अतिथि विद्वानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को उनके लिए एक समग्र एवं प्रभावी नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह घोषणा भोपाल स्थित रविंद्र भवन में आयोजित अतिथि विद्वान सम्मान समारोह के दौरान की गई।

10 जुलाई को भोपाल के रविंद्र भवन मे समारोह में प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार अतिथि विद्वानों की समस्याओं एवं अपेक्षाओं के प्रति संवेदनशील है और उनके हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को निर्देशित किया कि अतिथि विद्वानों की सेवाओं, मानदेय, कार्यस्थायित्व एवं अन्य आवश्यक विषयों को ध्यान में रखते हुए एक व्यवहारिक और न्यायसंगत नीति तैयार की जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है।

सम्मान समारोह में बड़ी संख्या में अतिथि विद्वान उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपनी विभिन्न मांगों और सुझावों को भी रखा। मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुनते हुए सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

अतिथि विद्वानों को उम्मीद है कि नई नीति के निर्माण से उनकी लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान होगा तथा उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत हजारों अतिथि विद्वानों को इसका लाभ मिलेगा।