अनूपपुर: एसडीओपी की खाली कुर्सी और पदोन्नत डीएसपी अरविंद जैन के एसडीओपी पद पर पदस्थापना और घमासान अभी से लग रहे गंभीर आरोप
अनूपपुर: एसडीओपी की खाली कुर्सी और पदोन्नत डीएसपी अरविंद जैन के एसडीओपी पद पर पदस्थापना और घमासान
अभी से लग रहे गंभीर आरोप
अनूपपुर/अनूपपुर पुलिस अनुभाग में बीते 6 महीनों से खाली पड़ी अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) यानी एसडीओपी की कुर्सी को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कोतवाली के पूर्व थाना प्रभारी अरविंद जैन की डीएसपी पद पर पदोन्नति के बाद उसी क्षेत्र में उनकी संभावित पदस्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और चर्चाओं का बाजार गर्म है। इतना ही नहीं राजनीतिक गलियारों में जन चर्चा है कि अनूपपुर कोतवाली क्षेत्र का पानी इतना मीठा रहा की डीएसपी अरविंद जैन का अनूपपुर में मन लग गया है उन्होंने अनूपपुर जिले के सभी सत्ता दल के नेताओं का तासीर जान गए हैं लोगों की माने तो मध्य प्रदेश शासन के मंत्री एवं अनूपपुर जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार, मध्य प्रदेश शासन के कुटीर एवं ग्राम उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल, पूर्व मंत्री अनूपपुर विधायक बिशाहू लाल सिंह, मध्य प्रदेश अनुसूचित जनजाति के आयोग अध्यक्ष रामलाल रातेल, भाजपा जिला अध्यक्ष हीरा सिंह भी चुप्पी साधे बैठे हैं ही नहीं बल्कि शायद एसडीओपी अनूपपुर बनाए जाने की अनुशंसा भी कर दिए हैं इस ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को ध्यान देना होगा कि कोतवाली प्रभारी अरविंद जैन में ऐसी कौन सी विशेष खासियत है कि उन्हें कोतवाली प्रभारी के बाद डीएसपी और अब एसडीओपी की कुर्सी सोपी जा सकती है इस मिठास की उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।
लंबी पदस्थापना पर सवाल
पिछले 3 वर्षों से अनूपपुर कोतवाली प्रभारी के रूप में कार्यरत रहे अधिकारी को पुन: उसी क्षेत्र में एसडीओपी बनाए जाने की चर्चाओं से स्थानीय लोगों और विपक्षी दलों में असंतोष है।
राजनैतिक संरक्षण के आरोप
स्थानीय चर्चाओं और राजनेताओं पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि पदस्थापना पाने के लिए प्रभाव और संसाधनों का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
अनूपपुर एसडीओपी यने'सुपर एसपी'
क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था पर तंज कसते हुए यह बात उठ रही है कि यदि नियमों और निष्पक्षता को दरकिनार कर पदस्थापना दी जानी है, तो फिर पद का दायरा ही क्यों सीमित रखा जाए।
विवाद की मुख्य वजहेंपारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न
एक ही क्षेत्र में लंबे समय तक पदस्थ रहने वाले अधिकारी को पदोन्नति के बाद पुनः उसी सब-डिवीजन में कमान सौंपने से निष्पक्ष कार्यप्रणाली प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
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भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
पूर्व कार्यकाल के दौरान रहे विवादों और कार्यशैली को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी है, जिससे कानून-व्यवस्था की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन
आमतौर पर पदोन्नति के बाद अधिकारियों को नए प्रशासनिक क्षेत्र में भेजा जाता है ताकि निष्पक्षता बनी रहे, लेकिन अनूपपुर में बन रही स्थितियों ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक हलकों की मांग है कि पुलिस मुख्यालय एवं राज्य शासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पदस्थापना करनी चाहिए, ताकि पुलिस प्रशासन की साख और जनता का विश्वास बना रहे।


