अनूपपुर के तीन युवकों को बड़ी राहत, अपहरण व फिरौती मामले में शासन की क्रिमिनल अपील खारिज
अनूपपुर के तीन युवकों को बड़ी राहत, अपहरण व फिरौती मामले में शासन की क्रिमिनल अपील खारिज
अनूपपुर। वर्ष 2019 में एक 13 वर्षीय बालक के कथित अपहरण एवं फिरौती मांगने के मामले में आरोपी बनाए गए अनूपपुर निवासी माखन पटेल, रामजी राठौर एवं कान्हा कहार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। Madhya Pradesh High Court की जबलपुर खंडपीठ ने शासन द्वारा दायर की गई क्रिमिनल अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में अनूपपुर पुलिस द्वारा एक 13 वर्षीय बालक के अपहरण तथा फिरौती मांगने के आरोप में उक्त तीनों युवकों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 366-A एवं 365 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस विवेचना के आधार पर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों का परीक्षण किया। न्यायालय ने पाया कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हुआ है। इसके परिणामस्वरूप ट्रायल कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त (बरी) कर दिया था।
ट्रायल कोर्ट के इस निर्णय को चुनौती देते हुए शासन की ओर से उच्च न्यायालय जबलपुर में क्रिमिनल अपील प्रस्तुत की गई। अपील में ट्रायल कोर्ट के निर्णय को पलटने और आरोपियों को दोषी ठहराने का आग्रह किया गया था।
आरोपीगण की ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता Deepak Kumar Pandey नियुक्त किए गए थे। प्रकरण में विस्तृत सुनवाई के बाद 16 जून को अंतिम बहस संपन्न हुई। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के उपरांत उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय को विधिसम्मत एवं उचित मानते हुए शासन की अपील को खारिज कर दिया।
उच्च न्यायालय के इस फैसले के साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा दिया गया आरोपमुक्ति का आदेश यथावत बना हुआ है। न्यायालय के निर्णय के बाद आरोपी पक्ष एवं उनके परिजनों में संतोष का माहौल देखा जा रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, उच्च न्यायालय द्वारा शासन की अपील खारिज किए जाने के बाद यह मामला आरोपियों के पक्ष में महत्वपूर्ण न्यायिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि दोनों स्तरों की अदालतों ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन के आरोपों को स्वीकार नहीं किया।


