अनूपपुर : टीएल बैठक में फ्लाईओवर की समीक्षा क्यों नहीं?
अनूपपुर : टीएल बैठक में फ्लाईओवर की समीक्षा क्यों नहीं?
अनूपपुर। जिले की सबसे बड़ी जनसमस्या बन चुके अनूपपुर फ्लाईओवर निर्माण कार्य की धीमी गति अब आम नागरिकों के धैर्य की परीक्षा लेने लगी है। वर्षों से निर्माणाधीन यह परियोजना न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आम जनजीवन पर भी प्रतिकूल असर डाल रही है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जिला कलेक्टर की प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाली टीएल (टाइम लिमिट) बैठक में फ्लाईओवर निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा क्यों नहीं होती?
टीएल बैठक में जिले के लगभग सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहते हैं। यह मंच लंबित कार्यों की समीक्षा, विभागों के बीच समन्वय और समय-सीमा में कार्य पूर्ण कराने के लिए सबसे प्रभावी व्यवस्था मानी जाती है। यदि फ्लाईओवर परियोजना को भी टीएल बैठक के एजेंडे में शामिल कर प्रत्येक सप्ताह इसकी प्रगति, बाधाओं और समाधान की समीक्षा की जाए, तो निश्चित रूप से कार्य में गति लाई जा सकती है।
फ्लाईओवर निर्माण से जुड़े विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, तकनीकी अड़चनें या प्रशासनिक विलंब जैसी समस्याएं भी नियमित समीक्षा के माध्यम से समय रहते दूर की जा सकती हैं। इससे संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी और जनता को यह भरोसा मिलेगा कि प्रशासन इस महत्वपूर्ण परियोजना को गंभीरता से ले रहा है।
अनूपपुर के नागरिक लंबे समय से इस फ्लाईओवर के पूर्ण होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। रोजाना लगने वाले जाम, दुर्घटना की आशंका और व्यापार पर पड़ रहे असर से लोग परेशान हैं। ऐसे में केवल निर्माण कार्य जारी रहने की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी साप्ताहिक निगरानी और स्पष्ट प्रगति भी दिखाई देनी चाहिए।
अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन फ्लाईओवर निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विषयों में शामिल करे और प्रत्येक सोमवार की टीएल बैठक में इसकी अनिवार्य समीक्षा सुनिश्चित करे।
नियमित मॉनिटरिंग, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई ही इस महत्वपूर्ण परियोजना को जल्द पूरा कराने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। जिले के विकास और आम जनता की सुविधा के लिए यह कदम समय की मांग है।


