संस्कार लॉ कॉलेज का हिस्ट्री का पेपर लीक, एक घंटे देरी से शुरू हुई परीक्षा,तुलसी महाविद्यालय के जिम्मेदारों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर फोड़ा ठीकरा— विजय उरमलिया की कलम से
अनूपपुर - अनूपपुर जिले में परीक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शुक्रवार को अनूपपुर स्थित तुलसी महाविद्यालय में संचालित संस्कार लॉ कॉलेज के बी.ए.एल.एल.बी. प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के दौरान ऐसा घोर प्रशासनिक चूक हुई, जिसने पूरे परीक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए।निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आज सोशियोलॉजी (समाजशास्त्र) का पेपर होना था। छात्र समय पर परीक्षा केंद्र पहुँचे, लेकिन परीक्षा कक्ष में बैठे छात्रों को जब प्रश्नपत्र वितरित किए गए तो वे हिस्ट्री (इतिहास) के निकले।छात्रों ने तत्काल आपत्ति जताते हुए बताया कि उनका आज समाजशास्त्र का पेपर निर्धारित है, न कि इतिहास का। इसके बाद परीक्षा केंद्र में हड़कंप मच गया।
छात्रों में बंट चुका था इतिहास का पेपर, लीक की स्थिति बनी
छात्रों के हाथों में इतिहास का प्रश्नपत्र पहुँच जाने के कारण पेपर लीक की स्थिति बन गई। आनन-फानन में कॉलेज प्रबंधन ने सभी छात्रों से इतिहास का प्रश्नपत्र वापस लिया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।
करीब एक घंटे की देरी के बाद अंततः समाजशास्त्र का सही प्रश्नपत्र वितरित कर परीक्षा शुरू कराई गई।
जिम्मेदारों से संपर्क की कोशिश, सब रहे खामोश
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया लेने के लिए जब तुलसी महाविद्यालय के प्राचार्य अनिल सक्सेना से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।
वहीं परीक्षा ड्यूटी में तैनात डॉ. जे.के. संत से भी संपर्क किया गया, लेकिन उनका भी फोन नहीं उठा।
परीक्षा प्रभारी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर डाला दोष
अंततः जब परीक्षा प्रभारी अजय राज राठौर से बात हो सकी, तो उन्होंने पूरे मामले का ठीकरा सीधे अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय (रीवा) के प्रबंधन पर फोड़ दिया।
उनका कहना था कि “टाइम टेबल में गलत प्रिंटिंग की वजह से यह स्थिति बनी।”
टाइम टेबल को लेकर कई सवाल
हालांकि परीक्षा प्रभारी के इस बयान के बाद भी कई सवाल जस के तस बने हुए हैं—
क्या टाइम टेबल आज ही छपा था?
जब छात्रों को पहले से पता था कि आज समाजशास्त्र और परसों इतिहास का पेपर है, तो कॉलेज स्तर पर ऐसी गलती कैसे हो गई?
क्या छात्रों और परीक्षा केंद्र को अलग-अलग टाइम टेबल दिए गए थे?
यदि नहीं, तो फिर गलत प्रश्नपत्र वितरण की जिम्मेदारी किसकी है?
मामले को दबाने की कोशिश?
सूत्रों की मानें तो फिलहाल कॉलेज और संबंधित जिम्मेदार इस पूरे मामले को दबाने में जुटे हुए हैं। लेकिन यह घटना न केवल छात्रों के भविष्य से जुड़ी है, बल्कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।