अनूपपुर फ्लाईओवर ब्रिज: 8 वर्षों से अधूरा निर्माण, जनता का सब्र टूटने की कगार पर
अनूपपुर फ्लाईओवर ब्रिज: 8 वर्षों से अधूरा निर्माण, जनता का सब्र टूटने की कगार पर
अनूपपुर। जिले के बहुप्रतीक्षित फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण कार्य पिछले लगभग आठ वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विकास की उम्मीदों के साथ शुरू किया गया यह प्रोजेक्ट अब लोगों के लिए परेशानी और नाराजगी का कारण बनता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस दूरी को फ्लाईओवर के माध्यम से महज 500 मीटर में तय किया जा सकता था, उसके लिए अब लोगों को लगभग 5 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। रोजाना हजारों राहगीर, छात्र, कर्मचारी, व्यापारी और मरीज इस समस्या से जूझ रहे हैं। समय और ईंधन की बर्बादी के साथ-साथ लोगों की आर्थिक क्षति भी हो रही है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की लापरवाही के कारण परियोजना वर्षों से अधर में लटकी हुई है। कई बार निर्माण कार्य शुरू होता दिखाई देता है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर काम बंद हो जाता है। इससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
फ्लाईओवर के अधूरे निर्माण के कारण शहर में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। रेलवे फाटक बंद होने के दौरान लंबा जाम लग जाता है, जिससे एंबुलेंस, स्कूल वाहन और आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है।
व्यापारियों का कहना है कि यातायात प्रभावित होने से स्थानीय व्यापार पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को भी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे उनका समय और धन दोनों खर्च हो रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन द्वारा कई बार जल्द निर्माण पूरा कराने के आश्वासन दिए गए, लेकिन धरातल पर स्थिति में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। अब नागरिकों ने मांग की है कि शासन और संबंधित विभाग इस परियोजना की समीक्षा कर निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर पूरा कराएं ताकि वर्षों से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया तो जनता आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगी। लोगों का साफ कहना है कि विकास कार्यों में देरी का खामियाजा आम जनता को नहीं भुगतना चाहिए।


