जिले की चौपट व्यवस्था के जिम्मेदार केलक्टर और पुलिस अधीक्षक,संजय खलको पर हुई कार्यवाही इस बात की तस्दीक है - विजय उरमलिया की कलम से
जिले की चौपट व्यवस्था के जिम्मेदार केलक्टर और पुलिस अधीक्षक,संजय खलको पर हुई कार्यवाही इस बात की तस्दीक है - विजय उरमलिया की कलम से
अनूपपुर - इन दिनों अनूपपुर जिले की व्यवस्थाएं पूरी तरह से चौपट हो चली है और अगर इस चौपट व्यवस्था का कोई जिम्मेदार है तो केवल और केवल अनूपपुर केलक्टर हर्षल पंचोली,और पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान चूंकि इनके अलावा जिले का कोई दूसरा माई बाप है नही और इसी बात का फायदा जिले के अधिकारी उठा रहे है लगातार चाहे भृष्टाचार की बात हो या माफ़ियाओं की पूरा का पूरा सिस्टम इनके सामने जमीदोज हो चला है,और इन सब के पीछे की सबसे बड़ी वजह जिले की राजनैतिक शून्यता जो अब अनूपपुर जिले को चारागाह साबित कर रहा है अधिकारी आता है अपने नवाचार से अपना उल्लू सीधा कर जिले को धरातल में छोड़ अन्यत्र स्थानांतरित हो कर चल देता है और यहां के नेताओं की कुंठित मानसिकता जिले को गर्त में ले जा रही है बात आज उन नेताओं के बारे में भी करने का वक्त है जिनके कंधों पर जिले की जनता ने जिले की विकास गाथा की जिम्मेदारी सौंपी थी पर दुर्भाग्य यह है कि ये नेता भी अपनी डफली अपना राग अलापने में इतने मशगूल रहे कि जिले का विकास पैदा होने से पहले ही मौत की आगोश में समा रहा है,जिले के वरिष्ठ नेता और अनूपपुर विधायक बिसाहूलाल सिंह कद्दावर नेता राजनीति में माने जाते थे पर आज उन पर बात करने का समय उचित नही है दूसरे पूर्व विधायक रामलाल रौतेल जो सिर्फ और सिर्फ चुनावी मूड में दिखाई देते है और नेता को होना भी चाहिये पर जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाएं किस तरह चरमराई हुई है यह देखना भी जिम्मेदारी आपकी तब और बढ़ जाती है जब आप की सरकार हो ,दूसरी तरफ कोतमा विधानसभा से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल पता नही किस बात का इन मंत्री महोदय को घमंड है पर इनका लहजा बता रहा है कि अगले विधानसभा में इन साहब को विधायकी का कोई मोह नही रहा या शायद इनको भी अहसास है कि अब मौका जनता नही देने वाली इसलिए इन्हें अनूपपुर जिले की चौपट व्यवस्था से कोई खास दिलचस्पी नही दिखती,तीसरे विधायक जो विपक्ष के है और कांग्रेस से लगातार तीसरी बार चुन कर विधानसभा पहुंचे तो है पर इनको भी सिर्फ और सिर्फ अपने चंद लोगों के अलावा किसी के विकास या जिले के विकास पर कोई खास दिलचस्पी नजर नही आती नतीजा ये है कि इनके विधानसभा में जनता आज भी मौलिक सुविधाओं से वंचित है,अब नंबर उस नेता का है जो जिले का पालक मंत्री या प्रभारी मंत्री कह सकते है इन सहाब का तो अनूपपुर जिले को लेकर कोई खाखा है ही नही अपना समय पूरा होने पर ये साहब आ जाते है और एक भू माफिया जो आज कल सबसे खास बनने का दावा करता है मंत्री महोदय की अनुपस्थिति के दौरान हुई सभी व्यवस्थाओं का हिसाब किताब दे कर जिले के पालक मंत्री दिलीप अहिरवार जिले को अनाथ छोड़ कर चल देते है अब भला बताओ कि इस जिले का विकास कैसे और कब होगा,
दूसरी तरफ आज एक कार्यवाही की चर्चा पूरे जिले में है जहां क्या आम क्या खास सब कह रहे है कि गलत हुआ दरसल कार्यवाही के पीछे की वजह जो आदेश में बताई गई दरसल हकीकत से पूरा का पूरा सिस्टम वाकिफ है कि असल वजह यह है ही नही कार्यवाही की हाल ही में एक नेता पुत्र और शराब ठेकेदार के आदमी के बीच कहा जा रहा है कि नेता पुत्र को धमकी मिली यह कांड भी सुनियोजित था और इस बात को पूरा का पूरा सिस्टम जानता था और इत्तेफाक से मजिस्ट्रेट बंगले की घटना ने अमली जामा पहनाने का काम कर दिया जो नेता पुत्र और उनके समर्थक चाहते थे वो काम मजिस्ट्रेट बंगले की घटना ने पूरा कर दिया और इत्तेफाक देखिए की मुख्यमंत्री का आगमन भी हो गया और जैसे ही उड़न खटोला उड़ा आदेश भी सामने आ गया जनता है सब जानती है,
बहरहाल जिले के कई थानों में लगातार अपराध हो रहे है और इससे पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान भी भलीभांति परिचित है पर कार्यवाही के नाम पर ढाक के तीन पात,दूसरी तरफ अनूपपुर केलक्टर हर्षल पंचोली को ऐसा नही है कि पता नही की जिले में प्रशासनिक व्यवस्था की दुर्गति कितनी है और कहां कितना अवैध कारोबार माफिया राज जिले को छलनी कर रहा है पर आज तक उन मामलों पर एक मे भी कार्यवाही न होना साहब की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है,अब आप सोचिए और गौर कीजिए कि जिस जिले का प्रशासन पूरी तरह फेल, पुलिस नेताओ के इशारे पर नाचने को मजबूर,और नेता अपने मस्ती में मस्त,पालक मंत्री जिले को पालने की जगह चंद भू माफ़ियाओं को पाल कर उनके सहारे खुद को पालने में लगे हो ऐसे जिले का विकास पैदा होने से पहले भ्रूण हत्या की ओर अग्रसर मेरा अनूपपुर


