जयमातादी स्टोन क्रेशर ने की दस सालों में कई करोड़ की रॉयल्टी चोरी,खनिज विभाग से लेकर प्रशासन सबकी मौन सहमति से सरकार के राजस्व की बड़ी चोरी - विजय उरमलिया की कलम से
अनूपपुर - अनूपपुर जिले के ग्राम ओढेरा में संचालित अवैध जय माता दी स्टोन क्रेशर ने विगत दस वर्षों में सरकार के खजाने में सीधे सीधे कई करोड़ की डकैती डाली है और इसके पीछे खनिज विभाग सबसे बड़ा जिम्मेदार है चूंकि जय माता दी स्टोन क्रेशर के मालिक खनन माफिया मुदित श्रीवास्तव की अगर दिन के 20 गाड़ी गिट्टी और डस्ट क्रेशर से लोड हो कर निकलती है तो उनमें से महज पांच गाड़ियों की रॉयल्टी काटी जाती है और रॉयल्टी काटने का तरीका ऐसा की उसी रॉयल्टी में कई चक्कर लगाये जाते है अगर गाड़ी को अमलाई गिट्टी खाली करने जाना है तो उसका रुट ओढेरा से सीधे सकरा होते हुए अमलाई नही जायेगी वो गाड़ी पहले अनूपपुर आएगी उसके बाद अमलाई जायेगी और 50 किलोमीटर की दूरी 100 किलोमीटर बता कर रॉयल्टी का समय बढ़ाया जाता है और उसी टाइम में मुदित श्रीवास्तव की गाड़ियां एक ही रॉयल्टी पर्ची से कई चक्कर लगाती है और बाकायदा इसकी जानकारी हमने साक्ष्यों के साथ अनूपपुर केलक्टर को दिया भी कई बार पर उनके द्वारा यह तो कहा गया अगर ऐसा कोई अवैध कर रहा है तो जानकारी दीजिये कार्यवाही होगी पर आज तक कार्यवाही नही हुई नतीजा हुआ की खनन माफिया लगातार रॉयल्टी की चोरी कर रहा है,और अगर कोई पत्रकार खबर छापे तो उसके खिलाफ झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी जाती है जब उसमे कामयाबी नही मिलती तो डग्गी चढ़वा कर हत्या का प्रयास भी किया जाता है,क्रेशर लगाने में कई फर्जी दस्तावेज तैयार कर लगाये गये, हमारे हाँथ कुछ ऐसे दस्तावेज हाँथ लगे है जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि क्रेशर लगाने के लिए कई फर्जी दस्तावेज लगाये गए है,वही हर दिन दस से 12 गाड़ी बिना रॉयल्टी के गिट्टी और डस्ट का परिवहन किया जाता है एक अनुमान के मुताबिक साल में करोड़ों रुपये की रॉयल्टी चोरी इस माफिया के द्वारा किया जाता है और इस बात की पुख्ता साक्ष्य हमारे पास मौजूद है तो कुल मिला कर दस वर्षों में सरकार के खजाने को इस माफिया ने कई करोड़ का चूना लगाया और जिम्मेदार कुम्भकर्णीय निद्रा में सोए रहे,क्रेशर का कुछ हिस्सा अवैध कब्जे में ओढेरा में संचालित अवैध क्रेशर अब और अवैध कार्य कर रहा है जहां इस क्रेशर का डोम है और डोम के पीछे का हिस्सा अवैध कब्जा है जिसकी जांच भी होना जरूरी है और अवैध क्रेशर हम क्यों कह रहे है हम उसका खुलासा भी करेंगे चूंकि इस जमीन का कामर्शियल उपयोग हो ही नही सकता था और किन जिम्मेदारों ने कामर्शियल उपयोग के लिए इस जमीन का विक्रय करवाया जबकि यह जिस विभाग की जमीन थी न तो वह बिक सकती है और न उसका कामर्शियल उपयोग हो सकता है,क्रेशर से ओढेरा का अस्तित्व खतरे में,बीच गांव में अवैध लगे इस क्रेशर से ओढेरा गांव का अस्तित्व अब खतरे में आ गया है चूंकि कई दस्तावेज कूट रचित तरीके से तैयार कर क्रेशर लगाने की अनुमति तो ले ली गई और सवाल उन अधिकारियों पर भी खड़ा होता है कि आखिर गाँव के अंदर क्रेशर लगाने की अनुमति देने के लिए आपने कितने में अपनी बोली लगाई मिली जानकारी के मुताबिक वन विभाग अनूपपुर में पदस्थ रहे संतोष श्रीवास्तव 2012 के आस पास पदस्थ रहे उसी दरमियान बहोत सारी जमीनें बेंची और खरीदी गई उसके बाद दोबारा साहब की पदस्थापना हुई उस दरमियान भी साहब ने संज्ञान लेना मुनासिब नही समझा अब साहब का कितना रोल है वही बता सकते है फिलहाल साहब की वर्तमान पदस्थापना व्यंकटनगर है,अब तो सवाल इस बात का है की जो जमीन बेंची और खरीदी नही जा सकती वह जमीन बिकी कैसे और ऊपर से कार्मशियल उपयोग के लिये, एक तरफ गांव के लोगो को धीमा जहर बो रहा यह क्रेशर दूसरी तरफ सरकार के करोड़ो रूपये चोरी किये गए पर धन्य है अनूपपुर का खनिज विभाग और प्रशासन जो इस माफिया के आगे सब नतमस्तक नजर आ रहे है