अनूपपुर रेत माफिया सूरज राठौर,प्रभात राठौर,सुभाष राठौर तिपान नदी का कर रहे चीरहरण,

तिपान से अब तक करोड़ों की रेत चोरी,तस्वीरें जिला प्रशासन के मुँह पर तमाचा  - विजय उरमलिया की कलम से 

अनूपपुर - खनिज विभाग अनूपपुर की निक्क्मेपन की एक और तस्वीर हम आप को दिखा रहे है और यह तस्वीरें इसलिए और भी दुर्भाग्य पूर्ण है चूँकि तस्वीर मुख्यालय के समीप की है जो चीख चीख कर खनिज विभाग और पुलिस की अकर्मण्यता को दिखाता है  दरसल अनूपपुर कलेक्टर कार्यालय,कलेक्टर जिला खनिज कार्यालय,पुलिस अधीक्षक कार्यालय अनूपपुर से तीन किलोमीटर दूर और नगरपलिका क्षेत्र से लगा हुआ तिपान नदी का बॉर्डर जहाँ लोग अक्सर मॉर्निग वॉक करते तो पहुँच जाते है पर जिम्मेदार आज तलक इतनी दूरी पिछले चार महीने में नहीं तय कर पाये और इसका नतीजा ये है की अनूपपुर के रेत माफिया या माफियाओं के सरगना सूरज राठौर और प्रभात राठौर के साथ सुभाष राठौर जो अवैध रेत उत्खनन माफिया के नाम से जाने जाते है और इनके द्वारा लगातार तिपान नदी का चीरहरण किया जा रहा है पर कुम्भकर्णीय निद्रा में सोये जिम्मेदार इन पर लगाम लगने की जगह सुकून से सोने में मसगुल है ये ताजा तस्वीरें आज सुबह चार बजे के बाद की है जहाँ हम जब टीपन नदी पहुंचे और वहां का नजारा देख कर हैरान हो गये दो ट्रैक्टर रेत लोड कर के निकल रहे थे और लगभग बीस से पच्चीस लोग रेत लोड करने वाले नदी में मौजूद थे कैमरा देखते ही रेत से भरे ट्रैक्टर भाग खड़े हुए तो रेत लोड करने वाले पानी के रास्ते ही अपना तगाड़ी फाउडा छोड़ नदी के दूसरे छोर की तरफ भाग खड़े हुए इसकी जानकारी जैसे ही रेत के अवैध उत्खनन के सरगन सूरज राठौर को लगी आनन फानन में अपने साथ प्रभात राठौर ,सुभाष राठौर के साथ हर्री बर्री फाटक के पास आ पहुंचे आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे की इस तिपान नदी पर सूरज राठौर ,प्रभात राठौर ,सुभाष राठौर की तिकड़ी आतंक मचा रखी हुई है जैसे ही आधी रात का पहर शुरू होता है ये रेत माफिया तिपान का चीरहरण करने में जुट जाते है अब सवाल यह उठता है की आख़िरकार इन रेत माफियाओं को किसका संरक्षण प्राप्त है की ये बेख़ौफ़ रात भर तिपान नदी का चीरहरण करते है और जिम्मेदार कुम्भकर्णीय निद्रा में सोते रहते है सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस विभाग की जो टीम रात गस्ती में रहती है इन रेत माफियाओं को बाकायदा संरक्षण देती है और इनकी अवैध गाड़िया पास कराने में मदद करती है और इसके एवज में ये रेट माफिया इन पुलिस कर्मियों को चढ़ोत्तरी बतौर उपहार दे अपना शागिर्द बना रेत के अवैध उत्खनन को चरम सीमा तक पहुँचाने का काम करते है 

आखिर कब जागेगा जिला प्रशासन 

इस पूरे रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन में पुलिस और खनिज विभाग से उम्मीद करना बेमानी साबित होगा अब देखना यह है की जिला कलेक्टर आशीष वशिष्ट क्या अपने अधीनस्थ खनिज विभाग पर नकले कसते हुए इन रेत माफियाओं पर अंकुश लगा पाते है या फिर यहाँ भी कोई राजनैतिक दबाव आता है ये तो वक्त बताएगा पर जिला कलेक्टर को खनिज विभाग से उसकी जिम्मेदारियां लेते हुए खुद टीम गठित कर खनिज माफियाओं पर समय रहते अगर अंकुश नहीं लगाया तो सरकार के राजस्व के साथ साथ नदियों के चीरहरण पर अंकुश लगा पाना बड़ा मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जायेगा