अपहरण की सूचना से खुला बड़ा रहस्य — हथपुरा का पादरी लक्षपत सिंह निकला वन्यजीव शिकार गिरोह से जुड़ा, डीएफओ ने किया खुलासा

पाली (उमरिया)।पाली थाना क्षेत्र के ग्राम हथपुरा में रविवार की रात हुई कथित “अपहरण” की घटना ने सोमवार को बड़ा मोड़ ले लिया।
थाना पाली में दर्ज इस मामले के बाद जब इसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी और शहडोल दक्षिण वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) श्रद्धा पेन्द्रों से हुई विशेष बातचीत में यह खुलासा हुआ कि जिसे ‘अपहरण’ बताया जा रहा था, उसे वास्तव में वन विभाग ने वन्यजीव अपराध के आरोप में हिरासत में लिया था।


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WCCB की सूचना पर हुई थी कार्रवाई

डीएफओ श्रद्धा पेन्द्रों ने बताया कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), जो भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन कार्यरत है, से प्राप्त सूचना के आधार पर जैतपुर वन विभाग की टीम ने कार्रवाई की थी।
इस कार्रवाई में शहडोल जिले के निवासी सुशील अधिकारी से पेंगोलिन की खपटे (स्केल्स) जब्त की गई थीं। पूछताछ में उसने बताया कि ये खपटे उसे ग्राम हथपुरा निवासी लक्षपत सिंह, जो पेशे से पादरी है, ने बेची थीं।

डीएफओ के अनुसार, आरोपी की निशानदेही पर 26 अक्टूबर की रात लगभग 11 बजे लक्षपत सिंह को उसके घर से विधिवत प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिसकी सूचना उसके परिवार को दी गई थी।
गिरफ्तारी पत्रक पर लक्षपत के दामाद के हस्ताक्षर भी दर्ज हैं।


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परिवार ने दर्ज कराई “अपहरण” की शिकायत

इसके बावजूद उसी रात लक्षपत सिंह के पुत्र जितेंद्र सिंह थाना पाली पहुंचे और किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पिता के “अपहरण” की शिकायत दर्ज कराई।
सूचना मिलते ही पाली पुलिस सक्रिय हो गई और रातभर खोजबीन में जुटी रही।
यहां तक कि उमरिया जिले के पुलिस अधीक्षक विजय भागवानी भी स्वयं मौके पर पहुंचे और पूरी स्थिति की जानकारी ली।
पुलिस रात से लेकर दिनभर परेशान रही, परंतु जब सच्चाई सामने आई तो मामला कुछ और ही निकला।

पाली पुलिस से संपर्क करने पर अधिकारियों ने बताया कि मामला जांचाधीन है, इसलिए इस समय कोई आधिकारिक बयान देना उचित नहीं होगा।


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डीएफओ का खुलासा — अंतरजिला गिरोह सक्रिय

डीएफओ श्रद्धा पेन्द्रों ने जानकारी दी कि यह एक अंतर-जिला वन्यजीव शिकार गिरोह है।
अब तक शहडोल, कटनी, उमरिया, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके कब्जे से लगभग 1 किलो 900 ग्राम पेंगोलिन की खपटे जब्त की गई हैं।

उन्होंने बताया कि पेंगोलिन एक दुर्लभ और विलुप्तप्राय वन्य प्राणी है, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है।
इस जीव की खपटे निकालने के लिए उसे पानी में उबालकर मारा जाता है — यह प्रक्रिया न केवल क्रूर, बल्कि कानूनन गंभीर अपराध है।
जप्त की गई मात्रा से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस गिरोह ने कई पेंगोलिनों का शिकार किया होगा।


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घुनघुटी वन क्षेत्र पर उठे सवाल

लक्षपत सिंह का गांव हथपुरा घुनघुटी वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो बाघ और अन्य वन्यजीवों का प्रमुख आवास क्षेत्र है।
ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े पैमाने पर चल रही शिकार गतिविधि की भनक स्थानीय वन अमले को क्यों नहीं लगी।
गौरतलब है कि इस क्षेत्र से पहले भी बाघों के शिकार की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन्यजीव अपराध नियंत्रण की स्थानीय निगरानी और सूचना तंत्र मजबूत न हुआ, तो ऐसे अपराध बार-बार दोहराए जा सकते हैं।

पुलिस और वन विभाग दोनों की जांच जारी

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब पाली पुलिस और वन विभाग समानांतर रूप से जांच में जुटे हैं।
पुलिस जहां अपहरण की झूठी सूचना दर्ज कराने के पहलू पर ध्यान केंद्रित कर रही है, वहीं वन विभाग अंतरजिला गिरोह की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।

अब देखना यह होगा कि इस झूठे अपहरण के मामले में पुलिस क्या रुख अपनाती है —
क्योंकि “भले ही झूठ के पैर न हों, पर भागता बहुत तेज है,” यह कहावत इस प्रकरण पर सटीक बैठती है।