श्रीयंत्र मंदिर में मनाई गई ब्रह्मलीन स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज की आठवीं पुण्यतिथि,गुरु स्मरण में उमड़ा श्रद्धा का सागर , भजन-कीर्तन , हवन-पूजन और हुआ विशाल भंडार साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि,,संवाददाता - श्रवण कुमार उपाध्याय
श्रीयंत्र मंदिर में मनाई गई ब्रह्मलीन स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज की आठवीं पुण्यतिथि,गुरु स्मरण में उमड़ा श्रद्धा का सागर , भजन-कीर्तन , हवन-पूजन और हुआ विशाल भंडार
साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि,,संवाददाता - श्रवण कुमार उपाध्याय

अमरकंटक - मां नर्मदा की उद्गम स्थली / पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित श्रीयंत्र मंदिर में परम पूज्य अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज की आठवीं पुण्यतिथि श्रद्धा , भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाई गई । इस अवसर पर आश्रम परिसर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में साधु-संतों , शिष्यों और श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने श्रद्धासुमन अर्पित किए ।

प्रातःकाल से ही आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन , गुरु वंदना , हवन-पूजन एवं धर्मचर्चा का क्रम प्रारंभ हो गया । वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा । श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर उनके बताए आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का संकल्प लिया ।
ब्रह्मलीन स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के पश्चात वर्तमान में इस पीठ का संचालन आश्रम अध्यक्ष श्री 108 स्वामी शरदपुरी जी महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है । आश्रम की व्यवस्थाओं एवं सेवा कार्यों का संचालन गणेश पाण्डेय द्वारा निरंतर किया जा रहा है । साथ ही श्रीयंत्र मंदिर के निर्माण कार्य को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है ।
स्वामी शरदपुरी जी महाराज ने बताया कि पुण्यतिथि समारोह के अंतर्गत भजन-कीर्तन , हवन-पूजन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज के आध्यात्मिक योगदान , धर्म सेवा और जनकल्याण के कार्यों का स्मरण किया गया ।
आश्रम से जुड़े संतोष सिंह , संदीप यादव एवं संजय गोयल ने बताया कि स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज का जीवन तप , त्याग , सेवा और साधना का अनुपम उदाहरण था । उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन धर्म प्रचार , मानव सेवा एवं आध्यात्मिक जागरण के लिए समर्पित कर दिया । उनके आदर्श आज भी हजारों श्रद्धालुओं को सत्य , सेवा और साधना के मार्ग पर प्रेरित कर रहे हैं ।
पुण्यतिथि समारोह में अमरकंटक सहित आसपास के क्षेत्रों एवं दूर-दराज़ से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया । श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा , सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अनुपम संगम बन गया ।


