डॉक्टर नदारद, मरीज रातभर इलाज के लिए इंतजार में, पाली अस्पताल की व्यवस्था सवालों में

उमरिया जिले के पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मंगलवार रात गंभीर चिकित्सा लापरवाही का मामला सामने आया है। मरीजों और परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में डॉक्टर रातभर अनुपस्थित रहे, जबकि दो गंभीर मरीजों की स्थिति लगातार बिगड़ती रही।

निपनिया गांव के दानपाल सिंह अपनी भतीजी को रात लगभग 9 बजे लूज़ मोशन और उल्टी की गंभीर समस्या के कारण अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उनका कहना है कि नर्स द्वारा केवल एक ड्रिप लगाई गई, लेकिन डॉक्टर बच्ची को देखने नहीं आए।

दानपाल सिंह ने बताया —
"बच्ची रातभर तकलीफ में रही। रातभर में उसे करीब 50 बार लूज़ मोशन हुआ। इतनी कमजोरी हो गई कि वह अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थी, लेकिन इलाज के नाम पर केवल एक ड्रिप दी गई।"

उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल की एक महिला स्टाफ ने उनसे कहा—
"इसे शहडोल ले जाइए, यह हमारे बस की बात नहीं है।"


इसी तरह ग्राम कुदरी निवासी कुंती बाई अपने पति रामदीन सिंह को दोपहर में अस्पताल लेकर आई थीं। उनका आरोप है कि मरीज को केवल एक बार डॉक्टर ने देखा और उसके बाद लगभग 20 घंटे तक कोई डॉक्टर दोबारा देखने नहीं आया।

*BMO का बयान — “डॉक्टर थे, लेकिन टोपी पहनने की वजह से पहचान नहीं पाए”*

इस मामले पर जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. पी. एल. सागर से बात की गई तो उन्होंने कहा—
"डॉक्टर अस्पताल में मौजूद थे। उन्होंने रात में मुझसे भी बात की थी। ठंड के कारण डॉक्टर कोट नहीं पहनकर टोपी पहनकर गए थे, शायद इसलिए मरीजों ने उन्हें पहचान नहीं पाया।"

साथ ही उन्होंने यह भी कहा—
"रात का समय था, इसलिए ज्यादा दवाइयाँ नहीं दी गई। हमारे पास 3–4 डॉक्टर हैं और सभी समय पर ड्यूटी करते हैं।"


*पाली नगर के प्रतिष्ठित नागरिक की प्रतिक्रिया*

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गोपाल वासवानी ने कहा—
"अगर डॉक्टर ड्यूटी पर थे तो मरीजों को देखने क्यों नहीं गए? यह बहाना कि मरीजों ने डॉक्टर को टोपी की वजह से नहीं पहचाना — बेहद गैर जिम्मेदाराना है। अस्पताल इलाज के लिए है, बहाने बनाने के लिए नहीं।"


*कलेक्टर से कार्रवाई की मांग*

इस पूरे मामले पर जब कलेक्टर धरणेन्द्र जैन से बात की गई तो उन्होंने कहा—
"डॉक्टर तो अस्पताल में तैनात रहते हैं, फिर भी यदि इलाज में इस तरह की लापरवाही हुई है तो मैं पूरी जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई करवाऊंगा।"

पाली नगर के नागरिकों ने प्रशासन से अस्पताल में ड्यूटी और इलाज व्यवस्था दुरुस्त करने की तत्काल मांग की है।

 

बीएमओ और फील्ड का विवाद — फील्ड बहाने पर सवाल

लोगों का कहना है कि बीएमओ अक्सर अपने निवास और जिम्मेदारी की वजह से शहडोल से अपडाउन करते हैं। इस पर बीएमओ डॉ. पी. एल. सागर ने कहा—
"मैं फील्ड पर भी रहता हूँ। फील्ड बहुत बड़ा है, जिसमें अमिलिहा और अन्य गांव शामिल हैं, और अमिलिहा शहडोल से जुड़ा है। इसलिए लोग सोचते होंगे कि मैं शहडोल से अपडाउन करता हूँ। ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरा निवास पाली में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास है।"

अब तो यह जांच के बाद ही पता चलेगा कि बीएमओ साहब सच में फील्ड में रहते हैं या फिर फील्ड के बहाने अपडाउन का खेल चलता रहता है।
बहरहाल, यह तर्क चाहे सच हो या नहीं, लोगों के लिए केवल एक बात तय है — इलाज की कमी में मरीज तड़पते और भटकते रहेंगे अगर कोई जिम्मेदार इस दम तोड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं देता।