इंदिरा गांधी जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक मे जिम्मेदार खा रहे हैं कमिशन , और छात्र कीड़े मकोड़े

अनूपपुर / इंदिरा गांधी जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक लालपुर में हॉस्टलों की में चल रहे खाने के मेस मे खाने की गुणवत्ता को लेकर तो कई बार विवाद हो चुका है और मारपीट नारेबाजी की घटनाएं तो आम है और यही नहीं कभी दाल में कभी सब्जी में तो कभी रोटी में कीड़े मकोड़े वाली तस्वीर और वीडियो तो  सोशल मीडिया पर पोस्ट होती रहती है. लेकिन इसके बावजूद कभी भी इस विश्वविद्यालय के प्रबंध तंत्र के द्वारा  छात्रों को मिल रही खाने की घटिया क्वालिटी पर कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया. हां इधर देखा गया कि विश्वविद्यालय का प्रबंध तंत्र व्यवस्था को चुस्त और दुरुस्त रखने के लिए हॉस्टलों के वार्डन तो बदल डाले लेकिन खाने की क्वालिटी जस की तस बनी रही जिस पर  केवल कागजी खानापूर्ति लिखा पड़ी तो होती रही लेकिन सुधार नहीं हुआ वहीं अब जब छात्राएं देर रात हॉस्टल के बाहर निकाल कर  पैसा पूरा खाना अधूरा का नारा लगा रही है तो अब बेहिचक कहा जा सकता है कि हॉस्टल के मेष संचालकों के द्वारा खाने की क्वांटिटी पर भी भारी गोलमाल किया जा रहा है  जिससे यहां के छात्र-छात्राओं में आक्रोश है और उक्त नारेबाजी का सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस बात का स्पष्ट शब्दों में संकेत है.

*कमीशन के खेल में सब कुछ चौपट*
: जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक में कमीशन का बोलबाला है बताया जाता है कि पहले जहां इन छात्र-छात्राओं से खाने के नाम पर  3000 तक प्रतिमाह लिया जाता था जिसमें दो बड़े जिम्मेदारों का कमीशन था जिसकी पोल खुलने के बाद वही  अब 2700 के आसपास कर दिया गया है लेकिन इसके बावजूद छात्र-छात्राओं का आरोप है कि अब भी  कुछ जिम्मेदार इसमें कमीशन खा रहे हैं जिसके कारण मिस संचालक खान की क्वालिटी और क्वांटिटी से गोलमाल करने के लिए मजबूर है सूत्रों का दावा है कि जब तक छात्र-छात्राओं के खाने में भ्रष्टाचार और कमीशन का खेल नहीं बंद होगा तब तक खाने की क्वालिटी और क्वांटिटी के कारण छात्र-छात्राओं को घटिया और कम खाना मिलता रहेगा |