एथेनॉल नीति पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को घेरना कितना उचित? पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का है पूरा मामला
एथेनॉल नीति पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को घेरना कितना उचित? पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र का है पूरा मामला
एथेनॉल मिश्रण नीति पर बिना तथ्य के बयानबाजी से बचने की जरूरत
अनूपपुर। देश में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol Programme) का संचालन और क्रियान्वयन मुख्य रूप से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, जबकि सड़क परिवहन मंत्रालय इसकी नीति लागू करने वाला मंत्रालय नहीं है।
हाल ही में भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने न्यायालय में दायर याचिका में स्पष्ट किया कि उनका E20 ईंधन कार्यक्रम के निर्माण या क्रियान्वयन में कोई प्रशासनिक अथवा वित्तीय दायित्व नहीं रहा है और उन्हें इस नीति से जोड़कर प्रसारित की जा रही भ्रामक सामग्री गलत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी नीति पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने से पहले यह देखना आवश्यक है कि संबंधित विषय किस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है। एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और प्रदूषण में कमी लाना बताया गया है। इस कार्यक्रम की निगरानी और संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा किया जाता है।
ऐसे में राजनीतिक बयानबाजी तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए। यदि किसी नीति पर आपत्ति है तो संबंधित मंत्रालय और उसके निर्णयों पर प्रश्न उठाना अधिक उचित माना जाता है, न कि ऐसे मंत्री पर जिनकी उस नीति के संचालन में प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं है।


