करंजिया कॉलेज में भर्ती घोटाला! इंटरव्यू देने वाले ही बना रहे थे ‘साहबों’ की चाय,सिस्टम पर बड़ा सवाल

डिंडोरी | शासकीय महाविद्यालय करंजिया एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में खुली धांधली सामने आई है,जहां इंटरव्यू देने वाले कर्मचारीयों से ही अधिकारियों की सेवा करवाई गई। टेबल-कुर्सी लगवाने से लेकर चाय-नाश्ता तक की व्यवस्था अभ्यर्थि कर्मचारीयों से कराई गई, जिसका वीडियो और फोटो भी सामने आया है।

 इंटरव्यू या ‘सेवा परीक्षा’?

भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल तब और गहरा गया जब इंटरव्यू देने वाले अभ्यर्थी ही अधिकारियों के लिए बाजार से चाय, कचौड़ी, केला लाते और बैठने की व्यवस्था करते कैमरे में कैद हुए। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बेरोजगार युवाओं के आत्मसम्मान के साथ भी खिलवाड़ है।

भोपाल में होनी थी प्रक्रिया, करंजिया में क्यों?

जहां प्रदेश के अन्य जिलों में आउटसोर्स भर्ती की पूरी प्रक्रिया सेडमैप भोपाल के माध्यम से कराई गई, वहीं करंजिया में अंतिम चरण का इंटरव्यू कॉलेज परिसर में ही आयोजित किया गया। इससे कॉलेज प्रबंधन और एजेंसी की मिलीभगत के आरोप और मजबूत हो रहे हैं।

पहले से काम कर रहे कर्मचारियों के पद भी निकाले

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन पदों पर पहले से आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें भुगतान भी हो रहा है, उन्हीं पदों पर फिर से भर्ती क्यों निकाली गई? क्या यह सिर्फ “लेन-देन” का खेल है, क्या पुराने कर्मचारियों को डराकर पैसा वसूलने की साजिश रची गई? कुल मिलाकर बड़े भ्रष्टाचार को यहां अंजाम देने की योजना है।

 लैब नहीं, लाइब्रेरी नहीं… फिर भर्ती क्यों?

कॉलेज की स्थिति खुद बदहाल है,भवन अधूरा, जर्जर कमरों में कक्षाएं,विज्ञान विषयों की लैब नहीं,लाइब्रेरी तक नहीं ऐसे में लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडर और बुक लिफ्टर जैसे पदों पर भर्ती करना सीधे-सीधे सवाल खड़ा करता है,जब सुविधा ही नहीं, तो भर्ती किस काम की? सूत्रों के अनुसार चयन सूची पहले से ही तय कर ली गई थी। बताया जा रहा है कि स्थानीय बेरोजगारों को नजरअंदाज कर बाहर के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। इंटरव्यू सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया।


*इनका कहना है*

 *जब इस सम्बन्ध मे अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अमर सिंह उद्दे से बात करनी चाही तो उन्होंने मोबाईल कॉल ही रिसीव नहीं किया*