कर्नाटक में अनूपपुर के प्रवासी मजदूरों की मौत: पलायन पर उठे सवाल, क्या जिले में रोजगार का है संकट?


अनूपपुर। कर्नाटक में काम करने गए अनूपपुर जिले के 5 प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत की खबर ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर अनूपपुर के श्रमिकों को हजारों किलोमीटर दूर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए क्यों जाना पड़ता है? स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी और लगातार बढ़ते पलायन को लेकर जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में अनूपपुर जिले के कई मजदूर कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में काम करने जाते हैं। लेकिन वहां हुई दुर्घटना में उनकी मौत ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके कार्यस्थलों पर उपलब्ध सुविधाओं को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। घटना की जांच जारी है और स्थानीय प्रशासन द्वारा कारणों का पता लगाया जा रहा है।
पलायन बना मजबूरी
अनूपपुर आदिवासी बहुल जिला है, जहां बड़ी संख्या में लोग आज भी कृषि और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। स्थानीय स्तर पर उद्योगों और स्थायी रोजगार के सीमित अवसरों के कारण हर वर्ष हजारों युवक-युवतियां रोजगार की तलाश में कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस हादसे के बाद लोगों का कहना है कि यदि जिले में पर्याप्त रोजगार उपलब्ध होता, तो शायद इन मजदूरों को दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। मनरेगा, स्वरोजगार योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन पलायन रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजना बनाए।
श्रमिक सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों का पंजीकरण, बीमा, सुरक्षा मानकों का पालन और समय-समय पर निगरानी आवश्यक है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में उन्हें और उनके परिवारों को समय पर सहायता मिल सके।
स्थानीय लोगों की मांग
मृतक मजदूरों के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए।
परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
प्रवासी मजदूरों के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए।
अनूपपुर जिले में स्थानीय रोजगार के नए अवसर विकसित किए जाएं।
पलायन रोकने के लिए प्रभावी जिला स्तरीय कार्ययोजना लागू की जाए।


*कई गंभीर प्रश्न*

कर्नाटक में हुई यह दुखद घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार, पलायन और श्रमिक सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर प्रश्नों को सामने लाती है। यदि स्थानीय स्तर पर सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया जाए, तो बड़ी संख्या में लोगों को अपने परिवारों से दूर जोखिम भरे कार्यस्थलों पर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।


*यह हुई घटना*

 कर्नाटक के बेंगलुरु के मदापट्टना स्थित ग्रेनाइट खदान में गुरुवार को 40 फीट की ऊंचाई से चट्टान गिरने से मध्य प्रदेश के अनूपपुर के रहने वाले 5 मजदूरों समेत 7 की मौत हो गई । पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर मृतकों और घायलों को मलबे से बाहर निकाला। चट्टान की चपेट में आने से कई मजदूरों के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। 
घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। 

हादसे के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने दुख जताते हुए जांच के निर्देश दिए। 
खदान मालिक ने मृतकों के परिजन को 10-10 लाख और घायलों को 5-5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई।

डीआईजी एस. गिरीश ने बताया कि खदान में ऊपर और नीचे दो क्रेशर संचालित हो रहे थे। हादसे के समय करीब 16 मजदूर काम कर रहे थे। 
ऊपरी हिस्से में ड्रिलिंग के दौरान विशाल ग्रेनाइट चट्टान फिसलकर नीचे गिरी, जिससे मजदूर मलबे में दब गए। हादसे में 5 मजदूर घायल हुए, जबकि 4 सुरक्षित बच निकले।


 *हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर*

कर्नाटक के ग्रेनाइट खदान हादसे में जान गंवाने वाले पांचों मजदूर
मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के #जैतहरी_थाना_क्षेत्र के निवासी थे। 
जैतहरी थाना प्रभारी के मुताबिक मृतकों में भुवनेश्वर सिंह गौंड, राजपाल सिंह (35), रामअवतार सिंह (31) और राजेश प्रसाद चौधरी (28) शामिल हैं, जबकि एक अन्य मृतक की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

तीन मजदूर घायल हुए हैं, जिनकी पहचान गुलाब सिंह (27), राजपाल सिंह (30) और छोटू लाल के रूप में हुई है।  पुलिस के अनुसार मृतकों में एक ग्राम सिंघोरा, एक ग्राम सेमरवार और एक ग्राम चोलना का रहने वाला था।