महिला कर्मचारी पर छींटाकशी के आरोपों के चलते नप गए जिला कोषालय के एलडीसी विष्णु देव तिवारी — विजय उरमलिया की कलम से
अनूपपुर – जिले के कोषालय विभाग में पदस्थ एक लिपिक के खिलाफ की गई शिकायतों ने आखिरकार प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। जिला कोषालय कार्यालय में अनुकंपा नियुक्ति से पदस्थ एलडीसी (लोअर डिवीजन क्लर्क) विष्णु देव तिवारी को अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने गंभीर आरोपों के बाद निलंबित कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला कोतमा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक विष्णु देव तिवारी ने किसी  महिला कर्मी की आउटसोर्स भर्ती कराने में भूमिका निभाई थी। भर्ती के बाद वे लगातार संबंधित विभाग पर दबाव बना रहे थे कि उक्त कर्मचारी से काम लेने में नरमी बरती जाए। इसी बीच विवाद बढ़ता गया और एक दिन तिवारी स्वयं बीएमओ कार्यालय पहुंच गए, जहां कथित तौर पर उनका व्यवहार विवाद का कारण बन गया।
बताया जाता है कि इस दौरान महिला कर्मचारियों पर छींटाकशी करने के आरोप भी सामने आए। सूत्रों की मानें तो इस मामले की शिकायत कोतमा के बीएमओ तथा सीएमएचओ अनूपपुर द्वारा कलेक्टर को की गई थी। महिला कर्मचारियों से जुड़े संवेदनशील मामले को देखते हुए कलेक्टर ने बिना देर किए मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल प्रभाव से विष्णु देव तिवारी को निलंबित करने की कार्रवाई कर दी।
हालांकि निलंबन आदेश को सार्वजनिक रूप से ज्यादा प्रचारित नहीं किया गया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि आदेश में पूरी घटना का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की गई है। यह भी चर्चा है कि विष्णु देव तिवारी पूर्व में भी अपने आचरण को लेकर विवादों में रहे हैं और कई बार उनके नशे की हालत में मिलने की बातें भी सामने आती रही हैं।
इस संबंध में विष्णु देव तिवारी से उनका पक्ष जानने के लिए हमने फोन पर चर्चा किया तो उनके द्वारा सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया और कहां गया की जांच कमेटी गठित कर जांच करा ली जाए मैं गया जरूर था बीएमओ कार्यालय कोतमा वहां पर कई लोग मौजूद थे मैंने ऐसा कुछ नही किया सारे आरोप निराधार है
वहीं जब जिला कोषालय अधिकारी से इस मामले में चर्चा की गई तो उन्होंने निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग से कुछ शिकायतें कलेक्टर के पास पहुंची थीं, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना का स्थान कोतमा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और यह प्रकरण सीधे तौर पर कोषालय कार्यालय से संबंधित नहीं है।