कलेक्टर हर्षल पंचोली को बदले जाने की मांग तेज, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
कलेक्टर हर्षल पंचोली को बदले जाने की मांग तेज, प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
अनूपपुर। जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों के बीच यह मांग उठने लगी है कि अनूपपुर जिले में लंबे समय से पदस्थ कलेक्टर हर्षल पंचोली का स्थानांतरण किया जाए और प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा एवं जवाबदेही लाई जाए। लोगों का आरोप है कि जिले में जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है, जबकि भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता के मामलों में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासन द्वारा गरीबों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई गांवों में पात्र हितग्राही आवास, पेंशन, रोजगार, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के निराकरण में भी अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे आमजन को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में चल रहे निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों का कहना है कि कई निर्माण कार्य गुणवत्ता विहीन हैं तथा उनकी नियमित मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों की जमीनी उपस्थिति कम होने के कारण ठेकेदारों और जिम्मेदार एजेंसियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं बन पा रहा है। इससे शासन के करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
जनचर्चा का एक बड़ा विषय यह भी है कि अनूपपुर कलेक्टर का ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण सीमित हो गया है। लोगों का कहना है कि यदि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नियमित रूप से गांवों का दौरा करें, जनता से संवाद स्थापित करें और विकास कार्यों की समीक्षा करें तो कई समस्याओं का समाधान समय रहते हो सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद की दूरी बढ़ती जा रही है, जिससे शिकायतें और समस्याएं लंबित होती जा रही हैं।
जिले में भ्रष्टाचार को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर नाराजगी व्यक्त की जा रही है। नागरिकों का आरोप है कि कई विभागों में बिना प्रभावी निगरानी के कार्य हो रहे हैं, जिससे पारदर्शिता प्रभावित हो रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनता तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना और विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर अधिकारियों द्वारा क्षेत्रीय निरीक्षण, जनसुनवाई और समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं तो प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है।
जिले में बढ़ती असंतुष्टि के बीच अब अनूपपुर कलेक्टर के स्थानांतरण की मांग राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर भी सुनाई देने लगी है। लोगों का कहना है कि जिले को ऐसे प्रशासनिक नेतृत्व की आवश्यकता है जो गांव-गांव पहुंचकर समस्याओं को समझे, विकास कार्यों की निगरानी करे और आम जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करे।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले समय में शासन स्तर पर इस विषय को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर जिलेवासियों की नजर बनी हुई है।


