..........तो लिप्टिस के सहारे काटे गये वन परिक्षेत्र बिजुरी कार्यालय में लगे बेष कीमती सागौन के पेड़ किसने किसकी अनुमति से बेचा? रेंज ऑफिसर की ईमानदारी पर सवालिया निशान

..........तो लिप्टिस के सहारे काटे गये वन परिक्षेत्र बिजुरी कार्यालय में लगे बेष कीमती सागौन के पेड़
किसने किसकी अनुमति से बेचा? रेंज ऑफिसर की ईमानदारी पर सवालिया निशान
इन्ट्रो- वन मंडल अनूपपुर का बिजुरी वन परिक्षेत्र यूं तो हमेशा से किसी न किसी मामले में सुर्खियां बटोरता रहा है,लेकिन हाल ही में जो सामने आ रहा है उसमें वन परिक्षेत्र परिसर के अंदर लगे सागौन के बेस कीमती पेड़ काट कर बेंच देने का मामला सामने आ रहा है सूत्रों की माने तो परिसर की बाउंड्री के पास लगे विशालकाय लिप्टिस के पेड़ से आस-पास के रहने वालों को उसके गिरने पर जान का खतरा बना हुआ था,जिसे काटे जाने का आवेदन लोगों ने दिया था उसी की आड़ में परिसर के अंदर लगे सागौन, खम्हार व इमली के पेड़ों को काटकर बेंच दिया गया,इसके बेचने की टीपी किसने जारी की यह सबसे बड़ा प्रश्न है,फिलहाल यह जानकारी वनमण्डलाधिकारी को है या नही लेकिन इस कारनामे ने बिजुरी वन परिक्षेत्राधिकारी की ईमानदारी पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
(क्राइम रिपोर्टर)
बिजुरी/अनूपपुर। जिन पेड़ों की कटाई पर खुद वन विभाग ने प्रतिबंध लगा रखा हो वही बेस कीमती पेड़ वन विभाग के परिषर से काटकर बेच दिए जाएं तो भला पदस्थ अधिकारी की ईमानदारी पर सवाल क्यों न खड़ा होगा,अगर किसी को हरा पेड़ काटना भी पड़े तो इसके लिए विभागीय इजाजत लेनी पड़ती है। विभाग स्थिति आवश्यकता को ध्यान में रख कर हरे पेड़ के काटने या काटने के संबंध में अपना फैसला दे सकता है। मगर यहां सूत्र बताते हैं कि इजाजत का कोई सवाल इसलिए नही था क्योंकि कांटे गए बेस कीमती पेड़ यहां पदस्थ जिम्मेदार अधिकारी की निगरानी में काटे गये इसीलिए किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुई। यह मामला वन मंडल अनूपपुर के अंतर्गत आने वाले वन परिक्षेत्र बिजुरी के कार्यालय परिसर का है, जहां सालों साल से लगे बेस कीमती सागौन,इमली व खम्हार के पेड़ किसकी परमिशन से काटे गए और किस टीवी पर भेज दिए गए यह खुद अधिकारियों को नहीं पता लेकिन पेड़ों की ठूंठ के निशान हकीकत को बयां कर रहे हैं बरहाल अब मामला जांच में जाएगा या फिर जंगल राज बरकरार रहेगा यह तो ओहदेदार अधिकारियों को समझना होगा क्योंकि जिन पौधों को लगाकर पेड़ों का आकार लेने तक उनके सुरक्षा की जिम्मेदारी में वन विभाग करोड़ों रुपए खर्च करता है वह पेड़ यूं ही काट कर अगर बेचे जाने लगेंगे तो पर्यावरण का क्या हाल होगा यह कह पाना मुश्किल होगा।
योजनाबद्ध तरीके से किया काम
वन परिक्षेत्र बिजुरी कार्यालय परिसर की बाउंड्री के अंदर लगे सागौन, खम्हार व इमली के बेशकीमती पेड़ों को काटने का काम पूरी एक योजना के तहत किया गया, यहां पर बाउंड्री के पास लगे विशालकाय लिप्टिस के पेड़ों के गिरने से वहां रहने वालों ने जीवन को खतरा बताते हुए शिकायत की थी बस यही से उन पेड़ों को काटने का जुगाड़ जम गया और फिर उन्हें लिप्टिस के कटे पेड़ों के साथ बिना किसी परमिशन व आशय के काटे गए बेशकीमती सागौन, खम्हार व इमली की सिल्लियों को बेंच भी दिया गया। अब जब यह मामला सामने आ गया है इसके बाद वहां पदस्थ जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं क्योंकि बेशकीमती सागौन, खम्हार व इमली के कांटे गए पेड़ों को बेचने के लिए किसी प्रकार की कोई टीपी नहीं जारी की गई।
पहले भी उठाते रहे हैं सवाल
जिले के वन परिक्षेत्र बिजुरी की सीमाएं छत्तीसगढ़ राज्य से सटी हुई है ऐसे में यहां छत्तीसगढ़ के माफियाओं के द्वारा भी अवैध तरीके से लकड़ी को काटकर बेचे जाने का काम किया जाता रहा है वही यहां पर वन भूमि से रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन के कई मामले सामने आए हैं सूत्र बताते हैं कि कई मर्तबा अवैध रेत के परिवहन में ट्रैक्टर ट्राली को पकड़ने के बाद बिना कार्रवाई के उसे छोड़ गया,जिससे माफियाओं के हौसले बुलंद हुए और अधिकारियों से सांठ-गांठ कर उनके द्वारा यहां पर पेड़ों की कटाई और रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन व्यापक पैमाने पर होता रहता है।
इनका कहना है
वन परिक्षेत्र बिजुरी परिषद की बाउंड्री के अंदर लगे सागौन,इमली व खम्हार का कोई पेड़ नही काटा गया है, नील गिरी के पेड़ काटे गये है वह भी परमिशन से यह जो भी जानकारी दी गई है वह झूठी व गलत है आप स्वयं आकर यहां देख सकते हैं।