कोल ब्लॉक आवंटन मामला: निधन के करीब दो साल बाद डॉ. मनमोहन सिंह को मिली कानूनी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी

नई दिल्ली। देश के बहुचर्चित कोल ब्लॉक आवंटन (कोलगेट) मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनके निधन के लगभग दो वर्ष बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी और मामले में उन्हें राहत प्रदान की। इससे वर्षों से चले आ रहे इस प्रकरण का अंत हो गया।

यह मामला उस समय का है जब डॉ. मनमोहन सिंह के पास प्रधानमंत्री पद के साथ-साथ कुछ समय के लिए कोयला मंत्रालय का भी प्रभार था। वर्ष 2015 में एक विशेष अदालत ने उन्हें आरोपी के रूप में तलब किया था, जिसके बाद उन्होंने इस आदेश को उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। बाद में सीबीआई ने अपनी जांच में उनके विरुद्ध अभियोजन चलाने योग्य साक्ष्य नहीं पाए और क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। अब सुप्रीम कोर्ट ने उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मामले का पटाक्षेप कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध जांच रिपोर्टों को खारिज करने और पूर्व प्रधानमंत्री के विरुद्ध संज्ञान लेने का कोई ठोस आधार नहीं था। अदालत ने माना कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट को अस्वीकार करने के पर्याप्त कारण सामने नहीं आए।

इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का कहना है कि देश के एक पूर्व प्रधानमंत्री को अपने जीवनकाल में इस मामले से अंतिम कानूनी राहत नहीं मिल सकी और यह फैसला उनके निधन के बाद आया। वहीं, दूसरी ओर इस निर्णय को न्यायिक प्रक्रिया का अंतिम निष्कर्ष बताते हुए कानून के शासन की मिसाल भी माना जा रहा है।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने कोल ब्लॉक आवंटन मामले में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ कार्यवाही समाप्त की।
  • सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार किया।
  • निधन के लगभग दो वर्ष बाद मिला अंतिम कानूनी निर्णय।
  • 11 वर्ष से अधिक समय तक चला विवाद अब न्यायिक रूप से समाप्त हुआ।