छात्र-युवा आंदोलन पर पुलिस दमन की भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) मध्य प्रदेश राज्य परिषद द्वारा कड़ी निंदा

 

अनूपपुर / भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) मध्य प्रदेश राज्य परिषद जंतर-मंतर, पटेल चौक, जनपथ, रायसीना रोड तथा आसपास के क्षेत्रों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के प्रयोग की कड़ी निंदा करती है। परिषद का आरोप है कि यह कार्रवाई मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा की गई।

यह आंदोलन परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की लगातार घटनाओं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), बढ़ती बेरोजगारी तथा छात्रों-युवाओं से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग कर रहे थे।

आयोजकों के अनुसार, इस आंदोलन को देशभर के अनेक छात्र एवं युवा संगठनों का समर्थन प्राप्त था। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में छात्रों, युवाओं तथा उनके अभिभावकों की अभूतपूर्व संख्या एकत्र हुई। प्रदर्शनकारी पिछले 21 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, किंतु केंद्र सरकार ने अब तक उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की है।

सीपीआई मध्य प्रदेश राज्य परिषद का कहना है कि एक लाख से अधिक छात्रों और युवाओं की भागीदारी देश की नई पीढ़ी की आकांक्षाओं और बढ़ते असंतोष का स्पष्ट प्रतीक है। परिषद का मत है कि सरकार अब युवाओं की आवाज़ को अनसुना नहीं कर सकती और उसे दमन के बजाय लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

 

सीपीआई मध्य प्रदेश राज्य परिषद की मांगें निम्नलिखित हैं—

 

1. छात्रों और युवाओं के शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन पर दमनात्मक कार्रवाई तत्काल बंद की जाए।

 

2. लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन तथा निरंकुश कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।

 

3. केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाया जाए।

 

4. आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए एआईएसएफ, एआईवाईएफ तथा अन्य छात्र-युवा संगठनों के सभी कार्यकर्ताओं एवं प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए।

 

5. छात्रों और युवाओं की सभी न्यायोचित मांगों को तत्काल स्वीकार किया जाए।