छुट्टी में होने के बावजूद पहुंचे सर्जन डॉ. साकेत कौशिक, आपातकालीन ऑपरेशन कर बचाई घायल की जान
छुट्टी में होने के बावजूद पहुंचे सर्जन डॉ. साकेत कौशिक, आपातकालीन ऑपरेशन कर बचाई घायल की जान
बैल के हमले में फटा पेट, बाहर आ गई थीं अंतड़ियां; एक घंटे चले ऑपरेशन से बची जान
अनूपपुर। कहा जाता है कि “डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं।” यह कहावत रविवार की रात जिला चिकित्सालय अनूपपुर में उस समय चरितार्थ होती दिखाई दी, जब अवकाश पर होने के बावजूद सर्जन डॉ. साकेत कौशिक ने अस्पताल पहुंचकर एक गंभीर रूप से घायल मरीज का सफल ऑपरेशन कर उसकी जान बचाई। उनके इस निःस्वार्थ सेवा भाव और कर्तव्यनिष्ठा की जिले भर में सराहना हो रही है।
जानकारी के अनुसार, बहादुर सिंह (45 वर्ष), निवासी वार्ड क्रमांक 3, ग्राम पंचायत गौरेला, रविवार रात अपने घर में पालतू बैल को बांध रहे थे। इसी दौरान बैल ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके पेट में गंभीर चोट लगी और पेट फट जाने से अंतड़ियां बाहर आ गईं। परिजन तत्काल उन्हें गंभीर अवस्था में जिला चिकित्सालय अनूपपुर लेकर पहुंचे।
अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. हिमांशु पांडे ने घायल की हालत अत्यंत गंभीर देखते हुए तत्काल सर्जन डॉ. साकेत कौशिक को सूचना दी। सूचना मिलते ही डॉ. कौशिक, जो उस समय अवकाश पर थे, बिना किसी देरी के रात लगभग 11 बजे अस्पताल पहुंच गए और मरीज के उपचार की जिम्मेदारी संभाल ली।
डॉ. कौशिक ने आपातकालीन चिकित्सक डॉ. हिमांशु पांडे, स्टाफ नर्सों और ड्रेसर की टीम के साथ मिलकर घायल का तत्काल ऑपरेशन शुरू किया। रात 11 बजे से लगभग 12 बजे तक चले एक घंटे के जटिल ऑपरेशन में चिकित्सकों ने बाहर निकली अंतड़ियों को सुरक्षित कर पेट की सफल सर्जरी की। समय रहते उपचार मिलने से मरीज की जान बच गई।
चिकित्सकों के अनुसार, यदि उपचार में थोड़ी भी देरी होती तो मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती थी। वर्तमान में घायल का उपचार जिला चिकित्सालय में जारी है और उसकी स्थिति पहले से बेहतर बताई जा रही है।
*सेवा भाव के लिए पहचाने जाते हैं डॉ. कौशिक*
जिला चिकित्सालय में पदस्थ सर्जन डॉ. साकेत कौशिक अपने सेवा भाव और मरीजों के प्रति समर्पण के लिए पहले भी चर्चित रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि वे निःस्वार्थ भाव से मरीजों का उपचार करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अवकाश अथवा निर्धारित ड्यूटी समय से परे जाकर भी मरीजों की सेवा के लिए उपलब्ध रहते हैं।
रविवार की रात की यह घटना भी इसी समर्पण का उदाहरण बनी, जब उन्होंने निजी सुविधा से ऊपर उठकर मानव जीवन की रक्षा को प्राथमिकता दी। घायल के परिजनों ने डॉ. कौशिक, डॉ. हिमांशु पांडे तथा पूरी चिकित्सकीय टीम का आभार व्यक्त किया है।
*लोगों ने की जमकर सराहना*
घटना की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र के लोगों ने डॉ. साकेत कौशिक के इस सराहनीय कार्य की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है। नागरिकों का कहना है कि ऐसे चिकित्सक स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक ताकत हैं, जो अपने कर्तव्य को केवल नौकरी नहीं बल्कि मानव सेवा का माध्यम मानते हैं। रविवार की रात किया गया यह कार्य एक बार फिर साबित करता है कि समर्पित चिकित्सकों की बदौलत अनेक लोगों को नया जीवन मिल रहा है।


