जंतर मंतर पहुंचे सेना के जवान ने किया छात्रों के आंदोलन का समर्थन, नीतियों पर उठाए सवाल
जंतर मंतर पहुंचे सेना के जवान ने किया छात्रों के आंदोलन का समर्थन, नीतियों पर उठाए सवाल
नई दिल्ली/ अनूपपुर/ जंतर मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को उस समय नया बल मिला जब एक सेना के जवान ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर छात्रों के समर्थन में अपनी बात रखी। जवान ने छात्रों की मांगों को न्यायसंगत बताते हुए कहा कि युवा अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं तथा उनकी आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार जवान ने खुले तौर पर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता और विशेष रूप से युवाओं की बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के हौसले की सराहना करते हुए कहा कि देश का भविष्य अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहा है।
जवान ने सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk के प्रति भी समर्थन व्यक्त करते हुए "सोनम वांगचुक जिंदाबाद" के नारे लगाए। इस दौरान आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों ने भी उनके समर्थन का स्वागत किया।
छात्र नेताओं का कहना है कि वे पिछले सात दिनों से केवल नमक और पानी के सहारे भूख हड़ताल कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं कर रही है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है।
जंतर मंतर पर लगातार बढ़ रहे समर्थन को आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और आम नागरिकों के बाद अब एक सेना के जवान द्वारा समर्थन दिए जाने से आंदोलन को नई चर्चा मिल गई है। हालांकि प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना और भूख हड़ताल जारी रहेगी। जंतर मंतर पर आंदोलन का माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।


