कानून को ताक पर रखकर जनसुनवाई! अनूपपुर थर्मल प्रोजेक्ट में बड़ा खेल, आदिवासी इलाकों के अधिकारों पर सीधा हमला - रिंकू रामजी मिश्रा
कानून को ताक पर रखकर जनसुनवाई! अनूपपुर थर्मल प्रोजेक्ट में बड़ा खेल, आदिवासी इलाकों के अधिकारों पर सीधा हमला
अनूपपुर - अनूपपुर जिले में प्रस्तावित अनूपपुर थर्मल ऊर्जा परियोजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कानूनी प्रावधानों की खुलेआम अनदेखी का आरोप लगा है। सामाजिक कार्यकर्ता रामजी रिंकू मिश्रा ने कलेक्टर को पत्र लिखकर 16 जनवरी 2026 को कोतमा स्थित शासकीय हाई स्कूल बैहाटोला में आयोजित जनसुनवाई पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
पत्र में साफ कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 की धारा–6 तथा मध्यप्रदेश नियम 2015 के नियम–13 का उल्लंघन हुआ है। नियमों के मुताबिक जिन गांवों की भूमि अधिग्रहण से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होती है, उन सभी ग्राम सभाओं में अलग–अलग जनसुनवाई कराना अनिवार्य है, लेकिन प्रशासन ने एक ही स्थान और एक ही तारीख को कई ग्राम पंचायतों की संयुक्त जनसुनवाई कराकर कानून को दरकिनार कर दिया।
मामला यहीं नहीं रुकता। कोतमा तहसील का क्षेत्र अनुसूचित (आदिवासी) क्षेत्र है, जहां PESA एक्ट लागू होता है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम सभा की सहमति और अलग प्रक्रिया अनिवार्य है। पत्र में आरोप है कि आदिवासी क्षेत्रों के विशेष अधिकारों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जो सीधे–सीधे संविधान और कानून की भावना के खिलाफ है।
पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि इस नियम विरुद्ध जनसुनवाई को तत्काल स्थगित किया जाए और प्रभावित सभी गांवों में पृथक–पृथक, विधिसम्मत जनसुनवाई आयोजित की जाए, ताकि ग्रामीणों और आदिवासी समुदाय की आवाज वास्तव में सुनी जा सके।
अब सवाल यह है कि
क्या प्रशासन कॉर्पोरेट परियोजनाओं के दबाव में कानून को ताक पर रख रहा है?
क्या आदिवासी इलाकों में ग्राम सभाओं के अधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?
यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो यह मामला आने वाले दिनों में बड़े जनआंदोलन और कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।


