जब शासन के दरवाजे बंद हुए, न्यायपालिका ने खोली उम्मीद की राह

अनूपपुर //  जब सारे रास्ते बंद हो जाएं उम्मीद की एक छोटी सी किरण न केवल सभी राह बना देती है बल्कि नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करती है, अनूपपुर जिले ने इसे चरितार्थ करके दिखाया है, मध्यप्रदेश के विखंडन के बाद वर्ष 2003 में अनूपपुर नया जिला बना जिसमें चार विकासखण्डों सहित अमलाई से वेंकटनगर, राजनगर से अमरकंटक तक जिले की सीमाएं बनाई गई,, कोतमा, पुष्पराजगढ़, अनूपपुर में अनुविभागीय अधिकारी स्तर के कार्यालय के साथ सिविल न्यायालय भी संचालित थे, वर्ष 2009 में अनूपपुर सिविल जिला घोषित हुआ और शासकीय तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर जीर्ण शीर्ण भवन में जिला न्यायालय प्रारंभ किया गया, जिला न्यायालय के संचालन हेतु मूलभूत आवश्यक संरचना नहीं होते हुए भी किसी प्रकार न्यायालय चलता रहा, अनूपपुर तहसील कार्यालय में जिला संयुक्त कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रअनूपपुर में जिला चिकित्सालय और इसी प्रकार खंड कार्यालयों को सीधे जिला कार्यालय में उन्नयन कर दिया गया, इन तेइस वर्षों में सभी कार्यालयों के बजट आ गए, जमीनों का अधिग्रहण हो गया नए नए भवन बन गए और अधिकारियों के भव्य बंगले बन गए, राज्य सरकार के पास जिला न्यायालय अनूपपुर के लिए बजट नहीं दिया गया, अधिवक्ता, समाजसेवी और पत्रकारों द्वारा निरंतर इस मांग को उठाया जाता रहा, यहां तक कि जिले के विधायकों ने विधानसभा में प्रश्न भी उठाए, मप्र के प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा घोषणाएं भी की गईं पर परिणाम शून्य ही रहा, ऐसा लग रहा था कि जिला न्यायालय भवन निर्माण के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं तभी हल्की सी एक उम्मीद की किरण उच्च न्यायालय जबलपुर से जागी, जब एक जनहित याचिका के रूप में इस मांग को स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2025 में सरकार और विधि विभाग को नोटिस जारी किया, जनता के बीच तरह तरह की चर्चाएं होने लगी और लगभग डेढ़ वर्ष बाद उच्च न्यायालय जबलपुर की सख्ती के बाद जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान विधि विभाग द्वारा अनूपपुर जिला न्यायालय के निर्माण हेतु पैतालिस करोड़ के आवंटन की स्वीकृत का कंप्लायंस रिपोर्ट महाधिवक्ता मप्र उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तुत किया गया, इस एक खबर से न केवल अनूपपुर जिले के अधिवक्तागण झूम उठे बल्कि जनता को अहसास हुआ कि जब शासन प्रशासन स्तर पर सुनवाई के रास्ते बंद हो जाते हैं तो न्यायपालिका ही एकमात्र रास्ता है , सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सरकार को आईना दिखाया और विधि विभाग से राज्य सरकार को प्राप्त होने वाली आय का हवाला भी दिया और सरकार की देरी पर आश्चर्य व्यक्त किया, भारतीय जनमानस आज भी न्यायपालिका पर अटूट विश्वास करती है और उच्च न्यायालय जबलपुर का निर्णय इसे प्रमाणित करता है,

 

... मनोज शुक्ला की कलम से