भोलेनाथ के जयघोष से गूंज उठा पाली नगर, 10 हज़ार श्रद्धालुओं की भव्य कांवड़ यात्रा संपन्न 

पाली (उमरिया)- सावन के पवित्र सोमवार पर आज पाली नगर श्रद्धा, भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया, जब माँ बिरासिनी सेवा समिति एवं पाली नगरवासियों के तत्वावधान में विशाल कांवड़ यात्रा का भव्य आयोजन किया गया। यात्रा की शुरुआत प्रातः 9 बजे सरस्वती स्कूल ग्राउंड समीप अमहाई झिरिया से हुई, जहां से हज़ारों श्रद्धालु जल लेकर पैदल चलते हुए बाबा पंचलेश्वर धाम, ग्राम बरबसपुर पहुंचे और भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित किया।

करीब 7 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में लगभग 10,000 श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कांवड़ियों की टोली हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष के साथ पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर करती रही। भगवा वस्त्रों और कंधों पर कांवड़ लिए भक्तों की यह टोली एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रही थी।

यह धार्मिक आयोजन अमोलेश्वर धाम के पूज्य पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 संत श्री बच्चू बाबा के सान्निध्य और आशीर्वाद में संपन्न हुआ, जिनकी दिव्य उपस्थिति ने सम्पूर्ण आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता से भर दिया।

विशेष बात यह रही कि नगर के विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों द्वारा इस विशाल यात्रा का भावपूर्ण स्वागत किया गया। कहीं खीर, फल और ठंडे पेय पदार्थों का वितरण किया गया तो कहीं श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा कर उनकी आस्था को सम्मान दिया गया। हर गली, हर चौराहा, हर घर से यात्रा पर श्रद्धा की वर्षा होती दिखाई दी।

यात्रा के सफल आयोजन और सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जगह-जगह व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सीताराम सत्या स्वयं यात्रा मार्ग पर मौजूद रहे, और सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करते हुए मोर्चा संभाले रखा। कहीं कोई अव्यवस्था न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया।

प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सुविधाएं भी यात्रा मार्ग पर तैनात की गई थीं, जिससे किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो।

पिछले तीन वर्षों से माँ बिरासिनी संचालन समिति इस भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन कर रही है, जो अब पाली नगर की एक गौरवशाली परंपरा बन चुकी है। पंचलेश्वर धाम पहुंचने पर श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां सभी ने प्रसाद ग्रहण किया। साथ ही, शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम, भक्ति संध्या एवं भजन आर्केस्ट्रा का आयोजन कर पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया गया।

यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सहयोग और अध्यात्म का अद्भुत संगम था, जो वर्षों तक लोगों के हृदय में भक्तिभाव से सजी स्मृति के रूप में जीवित रहेगा।