प्रशासनिक अवस्थाओं की भेंट चढ़ा उमरिया के पाली नगर का ऐतिहासिक जवारा जुलूस महज़ 150–200 कलश ही शामिल, विसर्जन कुंड पहुँचने से पहले बारिश ने कर दिया ठंडा ,,रिपोर्ट@राजकुमार गौतम उमरिया
उमरिया के पाली में फीका पड़ा ऐतिहासिक जवारा जुलूस,महज़ 150–200 कलश ही शामिल, विसर्जन कुंड पहुँचने से पहले बारिश ने कर दिया ठंडा
पाली (उमरिया) कभी अपने भव्य स्वरूप और विशाल कलश यात्रा के लिए पूरे भारतवर्ष में विख्यात पाली नगर का जवारा जुलूस इस बार फीका पड़ गया। नवरात्रि के नौवें दिन निकले इस जुलूस में महज़ 150 से 200 कलश ही शामिल हो सके। इसे देख श्रद्धालु और नगरवासी मायूस हो उठे।
लोगों का कहना है कि कभी जब जवारा जुलूस नगर की सड़कों से गुजरता था, तो मानो कई किलोमीटर तक सड़कों पर मखमली चादर बिछ जाती थी। परंपरागत नृत्य, काली नृत्य और हजारों कलश इस आयोजन को ऐतिहासिक पहचान दिलाते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह परंपरा लगातार अपनी चमक खो रही है और इस बार तो लगभग नाम मात्र ही निकला।
इस निराशाजनक स्थिति पर स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक चूक और मंदिर प्रबंधन की उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह ऐतिहासिक परंपरा पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
हालाँकि इस साल का जुलूस एक अलग कारण से भी चर्चा में रहा। श्रद्धालु व्यंग्य में कह रहे हैं कि माता बिरासिनी भी इस जुलूस की दुर्दशा देख व्यथित हो उठीं, तभी तो विसर्जन कुंड पहुँचने से पहले ही आसमान से बरसी बारिश ने जुलूस को ठंडा कर दिया।
स्थानीय लोग इस व्यंग्यात्मक एंगल को प्रशासन और प्रबंधन के लिए चेतावनी मान रहे हैं कि यदि अब भी लापरवाही जारी रही तो आने वाले समय में पाली का यह ऐतिहासिक जुलूस सिर्फ यादों में ही रह जाएगा।


