महिलाओं और लड़कियों के साथ  सामाजिक भेदभाव एवं हिंसा को रोकने की दिशा में एक 16 दिवसीय ‘जागते रहो’ अभियान,,रिपोर्ट @ अजय कुमार यादव बांदा
बांदा जिले के नरैनी ब्लॉक में महिलाओं और लड़कियों के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव एवं हिंसा को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मित्र16 दिवसीय ‘जागते रहो’ अभियान बुन्देलखण्ड द्वारा संचालित 16 दिवसीय ‘जागते रहो’ अभियान का शुभारम्भ 20 नवम्बर 2025 को ब्लॉक परिसर से किया गया। उद्घाटन समारोह में पुलिस उपाधीक्षक नरैनी कृष्णदत्त त्रिपाठी, खंड विकास अधिकारी प्रमोद कुमार, तथा एडीओ पंचायत सुशील द्विवेदी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर जागरूकता वाहन को रवाना किया। सीओ कृष्णदत्त त्रिपाठी ने कहा कि “महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता ही सुरक्षित वातावरण की सबसे मजबूत नींव है।” खंड विकास अधिकारी प्रमोद कुमार के अनुसार “हिंसा और भेदभाव को समाप्त करने के लिए समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। यह अभियान ग्रामीण समाज में सकारात्मक परिवर्तन की बड़ी शुरुआत है।” एडीओ पंचायत सुशील द्विवेदी ने कहा कि अभियान उसी दिशा में प्रभावी कदम है।” इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं एवं लड़कियों के प्रति हिंसा और भेदभाव को रोकना, पुरुषों व किशोर लड़कों को परिवारिक जिम्मेदारियों से जोड़ना तथा युवाओं में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति और आत्महत्या की घटनाओं पर चर्चा कर समाधान ढूँढ़ना है। मित्र बुन्देलखण्ड के महेन्द्र कुमार ने बताया कि पिछले दो वर्षों से यह अभियान निरंतर चल रहा है और इस बार भी 45 गाँवों में सामुदायिक बैठकें, गीत, नारे, रैली, कैंडिल मार्च और पोस्टर प्रदर्शनी के माध्यम से संवाद स्थापित किया जाएगा। पुरुषों और लड़कों की देखभाल के लिए जिम्मेदार बनाना। कोऑर्डिनेटर विष्णु कुमार के अनुसार अभियान नरैनी से चल कर रामपुरवा, बसराही, मलिकपुर, मसौनी, कटरा सहित कुल 45 गाँवों में पहुँचकर लोगों में जागरूकता बढ़ाएगा। अभियान का समापन 10 दिसम्बर 2025, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पर होगा। अभियान में मनीष कुमार, अटल बिहारी, महेन्द्र कुशवाहा, रानी, जयनारायण, शिवदेवी, कमलेश कुमार, राजेन्द्र प्रसाद, सिद्धगोपाल, संतोष कुमार, विष्णु, सुरेश कुमार संस्कार सेवा समिति अतर्रा, संतोष कुशवाहा ग्रीन एण्ड हैपी इंडिया ट्रस्ट बदौसा सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जुड़े हैं। यह अभियान ग्रामीण समाज में महिला सुरक्षा, समानता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।
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