पुष्पराजगढ़ के बसही में बड़े अग्रवाल के बड़े-बड़े काले कारनामे आंख मूंदे बैठा खनिज विभाग
लीज में खनन नहीं फिर कैसे चल रहा क्रेशर लाख टके का सवाल
इन्ट्रो-
जिला खनिज विभाग को जिले के सबसे भ्रष्ट विभाग की अगर उपाधि दी गई है तो इसमें कहीं से भी गलत नहीं है इस विभाग के कारण जिले के पत्थर माफिया जिस तरह से बेखौफ होकर खनिज विभाग के नियमों कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं वह अपने आप में एक ऐसा रिकॉर्ड है जो की खनिज विभाग और पत्थर माफियाओं के काले कारनामों के लिए स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए तो कम नहीं है।
(राम भैय्या)
अनूपपुर।
वैसे तो खनिज विभाग की भ्रष्ट अधिकारियों के कारण जिले में खनिज संपदा की लूट मची हुई है और इस लूट को असली अंजाम तक पहुंचने वाले खनन माफियाओं ने किस तरह से खनन विभाग के नियमों कानून की धज्जियां बिखेर रहे हैं इसको देखना है तो पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत के अंतर्गत भारतीय रेलवे लालपुर मार्ग पर स्थित बसई गांव में बड़े अग्रवाल के क्रेशर प्लांट तक आपको आना पड़ेगा यहां आने के बाद अगर आपने अपनी सूक्ष्म निगाहों से बड़े अग्रवाल के क्रेशर प्लांट और उनके द्वारा लीज पर ली गई खनन के लिए जमीन का निरीक्षण किया तो आपको दांतों तले उंगली दबाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ऐसा हम इसलिए लिख रहे हैं कि बड़े अग्रवाल ने जब से यहां पर खनन के लिए लीज की जमीन ली है तब से उसमें से किसी भी प्रकार का कोई खनन कार्य नहीं किया गया है इसके बावजूद लगभग 5 सालों से बड़े अग्रवाल का क्रेशर प्लांट चल रहा है अब यहां सवाल खड़ा होता है कि लीज आधारित इस क्रेशर प्लांट में जब लीज की जमीन पर खनन कार्य ही नहीं हो रहा है तो बड़े अग्रवाल को क्रेशर प्लांट के लिए पत्थर कहां से मिलते हैं जिसका जवाब ना तो खनन माफिया बड़े अग्रवाल और नहीं खनन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के पास है फिलहाल यह लाख टके का सवाल अपने जवाब के लिए सीएम हेल्पलाइन के साथ-साथ कई अधिकारियों का दरवाजा खटखटा चुका है लेकिन अभी तक किसी के पास से इसका जवाब नहीं आया है।
रात भर दौड़ते रहते हैं पत्थरों से लदे ट्रैक्टर

 


वसई, अमगवा, लपटी, मेठाखार बटकी, गढ़ी दादर,, मिर्ची दादर, दुनिया, ताली, से लेकर लालपुर तक  रात 10ः00 के बाद से सुबह 8ः00 बजे तक अवैध रूप से पत्थर से लदे सैकड़ो ट्रैक्टर दौड़ते रहते हैं  इन ट्रैक्टरों पर आसपास के गांव के जंगलों पहाड़ों से अवैध रूप से खनन करके पत्थर लोड करके क्रेशर प्लांट तक पहुंचाया जाता है। इसकी शिकायत भी कई बार की जा चुकी है यही नहीं सीएम हेल्पलाइन में भी इस क्षेत्र में अवैध खनन करके ट्रैक्टरों से क्रेशर प्लांट को पत्थर सप्लाई शिकायत की गई है लेकिन सवाल यही खड़ा होता है कि आखिर कार्रवाई कौन करें खनिज विभाग को अपनी अवैध वसूली से फुर्सत नहीं है तो वही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घर बैठे आई हुई लक्ष्मी को ठुकराने के मूड में नहीं है यही कारण है कि इस क्षेत्र में जगह-जगह खुलेआम बिना किसी नियम कानून के डर को ताक पर रखकर इस अवैध कार्य को अंजाम दे रहे हैं। यहां पर सबसे बड़ा सवाल है कि खनन विभाग के साथ-साथ स्थानी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी इस अवैध कार्य की जानकारी के बावजूद अपना आंख कान बंद करके जिस तरह से पत्थर माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं उसे इस क्षेत्र की आबो हवा के साथ-साथ इस क्षेत्र का जलस्तर भी नीचे चला जा रहा हैस यही नहीं इस क्षेत्र के जंगल विभाग की जमीनों पर भी अवैध खनन कार्य हो रहे हैं खनिज पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ वन विभाग भी मुक दर्शक बना हुआ है।
आधा दर्जन से ज्यादा क्रेशर प्लांट किसी में भी नियम कानून का पालन नहीं
यहां पर विशेष उल्लेखनीय तथ्य है कि बसई से लेकर लालपुर तक आधा दर्जन से ज्यादा क्रेशर प्लांट संचालित है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि लाख खोजने के बावजूद भी एक भी क्रेशर प्लांट को नियम कानून के साथ संचालित होने का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता यह दीगर बात है कि जिले के सबसे भ्रष्ट विभाग खनिज विभाग को उक्त क्रेशर प्लांट की कमियां नजर नहीं आती अगर यह कहा जाए कि उनके आंखों में पत्थर माफियाओं द्वारा चढ़ाई जा रहे चढ़ावे की पट्टी बंधी है तो गलत नहीं है। यहां पर विशेष उल्लेखनीय तथ्य भी है कि चाहे क्रेशर प्लांट की चारदीवारी हो या क्रेशर प्लांट को एनजीटी के अंतर्गत वृक्षारोपण का मामला कहीं से भी इन क्रेशर प्लांटॉ को सही नहीं ठहराया जा सकता लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि इसके बावजूद सभी क्रेशर प्लांट संचालित हो रहे हैं जिसका मुख्य कारण यही है कि इस क्षेत्र के पत्थर माफिया एक मोटी रकम खनिज विभाग को चढ़ने के रूप में चढ़ाते हैं जहां से इसका हिस्साहट जिम्मेदारों के पास तक जाता है।