नगरपालिका अनूपपुर की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन,आज भी कई जगह सड़को से महरूम शहर दुर्गति की गवाही देता,ट्रिपल इंजन की सरकार भी पैदा न कर सकी विकास 
अनूपपुर - जिले में अगर नगर पालिका, नगर परिषद की बात की जाये तो जिला मुख्यालय की नगरपालिका सबसे दुर्दशा की शिकार है हालात यह है की जिला मुख्यालय के कई वार्ड में आज भी सड़को की हालत या तो खराब है या सड़के है ही नही तो कई जगह सड़को में नाली नही तो गंदा पानी सरे राह जिम्मेदारों का मुह चिढ़ा रहा है,जब विगत चुनाव में अंजुलिका शैलेन्द्र सिंह अध्यक्ष बनी तो लोगों के मन मे एक विकास की आश जागी थी पर दुर्भाग्य से उनका कार्यकाल भी चंद लोगों के बीच हो कर गुजर रहा है तो दूसरी तरफ उपाध्यक्ष की कुर्सी पर बस्ती के वार्ड नंबर 13 से जीत कर आये पिंटू सोनाली तिवारी उपाध्यक्ष बने लोगों की उम्मीद थी युवा चहरा विकास के आयाम लिखने में पालिका में कुछ करता दिखेगा पर वहां भी ढाक के तीन पात तू चल मैं आया कि तर्ज पर कार्यकाल चंद लोगों में पूरा करने की कवायद जारी है,जिला मुख्यालय के नगरपालिका के हालात इतने बदतर है कि पार्षदों के तो भगवान ही मालिक है अपनी अपनी सेटिंग के हिसाब से अपना अपना रुतवा दिखाने में सब मशगूल नजर आते है जबकि शहर के हालात कहीं से भी जिला मुख्यालय जैसे नही दिख रहे ,दरसल आप को जगह जगह कचरा फैला नजर आएगा तो सड़को पर गंदा पानी शहर की आबो हवा खराब कर रहा है तो सड़को की जरूरत लोगों को ऐसी हो गई है जैसे  बेरोजगार युवक को शादी के लिए लड़की न मिल रही हो,दरसल दुर्भाग्य नगरपालिका में निवासरत जनता का है वो जिसको भी चुन कर इस परिषद में भेजती है वही जनता को ठेंगा दिखा देता है सबसे बुरे दौर से गुजर रही नगरपालिका अनूपपुर आखिर कब लोगों को कम से कम सड़क नाली और पीने का पानी मयस्सर करा पाएगी राम ही जाने,मुख्यालय की नगरपालिका में सत्ता पक्ष काबिज है भाजपा डबल इंजन की बात करती है साहब आपके पास तो तीन इंजन की सरकार है केंद्र में आप राज्य में आप नगरपालिका में आप फिर विकास क्यों नही पैदा हो रहा जनता को बताइयेगा जरूर की यहां जैतहरी,कोतमा,भालूमाड़ा,बिजुरी,अमरकंटक जैसा विकास पैदा होने में कौन सा ग्रहण लगा हुआ है कुछ पार्षद तो ऐसे है कि जिस वार्ड से जीत कर सत्ता की कुर्सी पर विराजमान हुए है उसी वार्ड की जनता को भूतकाल समझ अपना वर्तमान देखने मे लग गये है और कई कई महीनों से उन पार्षद महोदय का मुह वार्ड की जनता को नही दिखा ऐसा लग रहा है पार्षद महोदय अमावस्या के चांद हो गये हो तो दूसरी तरफ परिषद का जब गठन हुआ था अध्यक्ष उपाध्यक्ष की स्पीड देख लगता था कि जिला मुख्यालय में जल्द ही विकास पैदा हो जायेगा पर समय से पहले ही लगता है विकास गर्भ में ही दम तोड़ गया और  शहर के लोगों को आज भी इंतजार है कि आखिर उनके शहर में विकास की किलकारी कब गूंजेगी