डीजीएमएस रिपोर्ट के बिना जिले में संचालित हो रही पत्थर की खदान माइनिंग विभाग कठपुतली
कैसे होगी कार्रवाई खा रहे सभी मलाई

इन्ट्रो- जिलेभर में वर्तमान में लगभग 70 से ज्यादा पत्थर की खदान संचालित है अधिकतर खदानें 6 मीटर से गहरी खोदी जा रही है और इसके लिए सरकार द्वारा तय किए गए डीजीएमएस की रिपोर्ट अनिवार्य है इसके बावजूद 6 मीटर से ज्यादा गहराई तक को दी जाने वाली खदानों के पास डीजीएमएस की कोई रिपोर्ट नहीं है जो इस बात को स्पष्ट तौर पर प्रमाणित कर रही है कि यहां के पत्थर माफियाओं के सामने खनन और सरकार का कोई भी नियम कानून कोई मतलब नहीं रखता।

 



अनूपपुर। जिले के पत्थर माफियाओं के सामने नतमस्तक जिला खनिज विभाग की कहानी किसी से छिपी नहीं है। खनन को लेकर बनाए गए सभी नियम कानून जिसको प्लीज होल्डर से पालन करने की जिम्मेदारी जिला खनिज विभाग की होती है। लेकिन यह जिले की जनता का दुर्भाग्य है कि जिला खनिज विभाग चाँद चांदी के सिक्कों के आगे अपने दोनों हाथ बांधकर अंधे गूंगे बहरे की तरह पत्थर माफियाओं के सामने केवल जी हुजूरी करने में व्यस्त है। ऐसे में चाहे क्रेशर प्लांट की बाउंड्री का सवाल हो या खदानों के चारों तरफ घेरा यही नहीं एनजीटी के सारे नियम कानून जिसमें मुख्य रूप से क्रेशर प्लांट और खदान की जगह वृक्षारोपण किसी भी नियम कानून का पालन नहीं हो रहा है अगर यह कहा जाए कि जिले का एक भी क्रेशर प्लांट या पत्थर की खदान मध्य प्रदेश सरकार और खनिज विभाग के नियमों के तहत संचालित नहीं हो रहा है तो गलत नहीं है। ऐसा नहीं है कि पत्थर माफियाओं की मनमानी की शिकायत नहीं की जाती लेकिन इसके बावजूद पत्थर माफियाओं पर इसका कहीं भी किसी भी प्रकार का असर नहीं दिखता जिसके पीछे का मुख्य कारण यही है कि इस नियम कानून का पालन करने के लिए जिन कंधों पर जिम्मेदारी है वह अपने कर्तव्य के प्रति काम और पत्थर माफियाओं के प्रति ज्यादा जिम्मेदार नजर आते हैं। यही कारण है कि 43 से ज्यादा सीएम हेल्पलाइन आधा दर्जन जनसुनवाई और खनिज विभाग से लेकर मुख्यमंत्री तक दर्जनों शिकायत पत्रों के बावजूद अनूपपुर जिले के पत्थर माफिया अपनी मनमानी पर उतारू है।
जिले के कोने-कोने में मौजूद है पाताल तोड़ खुदाई का प्रमाण
जिले का कोतमा क्षेत्र हो या पुष्पराजगढ़ जहां भी पत्थर की खदानें हैं आप उन पत्थर खदानों पर चले जाइए आपको अपने आप कुछ कहने और कुछ देखने की जरूरत नहीं है तय मापदंड के 6 मीटर से कई गुना ज्यादा गहरी खदानें जिसे अगर पाताल तोड़ खुदाई कहा जाए तो गलत नहीं है अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि जिले में खनन विभाग मात्र औपचारिकता निभा रहा है। जिसके कारण पत्थर माफिया खुलेआम बेखौफ होकर खनिज विभाग के नियम कानून की धज्जियां उड़ाने में मस्त हैं।
6 मीटर से गहरी खदानों के लिए डीएमएस रिपोर्ट अनिवार्य
खनन विभाग की सूत्रों की माने तो जिन पत्थर की खदानों में 6 मीटर से गहरी खुदाई हो रही है उसके लिए डीएमएस की रिपोर्ट अनिवार्य है। बिना डीएमएस की रिपोर्ट के 6 मीटर से गहरी खदानों में खनन कार्य नहीं हो सकता ऐसा खनन विभाग का नियम और कानून कहता है। इसके बावजूद अगर जिले की खदानों की बात की जाए तो उंगलियों पर गिनी जाने लायक कुछ ही ऐसी खदानें हैं जिनके पास डीएमएस की रिपोर्ट है। कहने को तो सभी खदानों के संचालक यह जरूर बताते हैं कि उन्होंने डीएमएस रिपोर्ट के लिए आवेदन किया है और जैसे ही रिपोर्ट आ जाएगी वह आपको दिखा देंगे। जबकि खनन विभाग का नियम यह कहता है कि 6 मीटर से गहरी खदानों में जब तक डीएमएस की रिपोर्ट ना आ जाए तब तक खदान मालिक खनन कार्य नहीं कर सकता लेकिन दुर्भाग्य की बात यही है कि इस नियम कानून को पालन करने के लिए कड़ा कदम कौन उठाए।