पाली नगर के ऐतिहासिक सगरा तालाब में धूमधाम से मनाया गया छठ पर्व

पाली (उमरिया)। सूर्य उपासना और लोकआस्था का प्रतीक पर्व छठ पूजा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पाली नगर के ऐतिहासिक सगरा तालाब में बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। नगरवासियों की भारी भीड़ इस अवसर पर एकत्रित हुई, जहां पूरे वातावरण में भक्ति और आस्था की अनोखी छटा बिखरी रही।

चार दिवसीय आस्था का पर्व

छठ पर्व चार दिनों तक चलने वाला पावन उत्सव है, जिसमें श्रद्धालु महिलाएं और पुरुष कठोर व्रत रखकर सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना करते हैं। नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के क्रम में यह पर्व पूर्ण होता है। ऐसा माना जाता है कि सूर्यदेव की उपासना से जीवन में सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

सगरा तालाब बना आस्था का केंद्र

पाली नगर का ऐतिहासिक सगरा तालाब इस अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बन गया। व्रती महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर अपने परिजनों के साथ तालाब तट पर पहुंचीं और अस्त होते सूर्य को दूध, जल तथा ठेकुआ सहित पारंपरिक प्रसाद अर्पित किया। नगर पालिका द्वारा घाट में साफ-सफाई एवम् टेंट आदि की व्यवस्था कराई गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके और वातावरण स्वच्छ बना रहे।

महिलाओं की रही प्रमुख भूमिका

इस पर्व में नगर की महिलाओं की विशेष भूमिका रही। उन्होंने पूरे नियम-निष्ठा और संयम के साथ व्रत रखकर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। महिलाओं के साथ पुरुषों और बच्चों ने भी पूरे उत्साह से सहभागिता निभाई, जिससे सगरा तालाब परिसर में सामूहिक आस्था का अनूठा दृश्य देखने को मिला।

प्रशासन और समाज का सहयोग

पाली नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए। सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के लिए पूरी तैयारी की गई थी।

भक्ति, अनुशासन और लोकसंस्कृति का पर्व

छठ पर्व न केवल पूजा का अवसर है, बल्कि यह लोकसंस्कृति, स्वच्छता और सामाजिक एकता का संदेश देने वाला उत्सव भी है। सगरा तालाब परिसर में देर रात तक भक्ति गीतों और लोकसंगीत की मधुर ध्वनियाँ गूंजती रहीं, जो नगरवासियों के मन में आस्था और आनंद का संचार करती रहीं।